संयुक्त राष्ट्र के तीन विशेष रिपोर्टरों ने भारत में विशेष तीव्र संशोधन (SIR) प्रक्रिया को अपारदर्शी और अल्पसंख्यकों के बहिष्कार की ओर इशारा किया। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को निराधार और अनावश्यक ठहराते हुए प्रक्रिया की पारदर्शिता और संवैधानिकता पर बल दिया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- UN रिपोर्टरों ने SIR प्रक्रिया को अस्पष्ट कहा
- चुनाव आयोग ने आरोपों को बिना आधार के खारिज किया
- सुप्रीम कोर्ट ने SIR की वैधता की पुष्टि की
संयुक्त राष्ट्र की तीन विशेष रिपोर्टरों ने भारत के 13 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में चल रही विशेष तीव्र संशोधन (SIR) प्रक्रिया को "अस्पष्ट" और "अल्पसंख्यक समूहों के बहिष्कार" से जुड़ा बताया। उन्होंने विशेष रूप से एआई‑आधारित प्रणाली की अस्पष्टता, दस्तावेज़ीकरण के लिये अपर्याप्त समय और नाम हटाने के आधार को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।
पृष्ठभूमि और कानूनी ढांचा
SIR को भारत के निर्वाचन कानूनों के तहत संवैधानिक प्रक्रम के रूप में स्थापित किया गया है। अनुच्छेद 326 के अनुसार, 18 वर्ष से अधिक आयु, भारतीय नागरिक और कानूनी रूप से अयोग्य न होने वाले नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल किया जाता है, जबकि मृत, अभाव, डुप्लिकेट और विदेशी नामों को हटाया जाता है। इस प्रक्रिया को राज्य‑स्तर के कर्मचारियों, बूथ‑स्तर के अधिकृतों और कई राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की राजनीतिक पार्टियों के निरीक्षण में संचालित किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट का समर्थन
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में SIR के इरादे और प्रक्रिया दोनों को वैध ठहराया, जिससे चुनाव आयोग के इस कदम को न्यायिक मान्यता मिली। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि प्रक्रिया में प्रत्येक मतदाता को अपने नाम को चुनौती देने का पर्याप्त अवसर दिया गया है, और सूची में किसी भी अल्पसंख्यक के प्रति पक्षपात नहीं दिखाया गया।
UN रिपोर्ट में उठाए गए विशिष्ट मुद्दे
रिपोर्ट ने पश्चिम बंगाल के नंदिग्राम में विशेष रूप से मुस्लिम मतदाता के बड़े पैमाने पर हटाने का उल्लेख किया, जहाँ 95% हटाए गए नाम मुस्लिम थे, जबकि क्षेत्र में उनका प्रतिशत केवल 25% था। रिपोर्ट ने इसे "मानव अधिकारों के कई उल्लंघनों" के रूप में वर्गीकृत किया। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आंकड़ों को असत्य बताया और कहा कि डेटा को वास्तविक फील्ड सत्यापन, दस्तावेज़ी जांच और चयनित अधिकारी द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर अपडेट किया गया है।
प्रक्रिया की पारदर्शिता और आगे की दिशा
अधिकारियों ने कहा कि SIR में कोई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणाली नहीं प्रयोग की गई, और सभी सत्यापन कदम फ़ील्ड‑स्तर पर BLO (ब्लॉक लेवल ऑफिसर) तथा पार्टी‑प्रायोजित बूथ‑स्तर एजेंटों द्वारा किया जाता है। साथ ही, प्रत्येक बूथ की मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी नागरिकों को आपत्ति दर्ज करने का अधिकार रहता है, जिससे निरंतर अद्यतन की संभावना बनी रहती है। चुनाव आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि इस प्रक्रिया में लगभग 95 करोड़ मतदाताओं की भागीदारी रही, और कई राज्यों में स्वतंत्रता के बाद से सबसे अधिक मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया।