हैदराबाद पुलिस के एक उपनिरीक्षक को अपनी छह साल की पोती को गाड़ी चलाते हुए देखा गया, जबकि वह गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए तैयारी का बहाना बना रहा। घटना ने सोशल मीडिया पर तेज़ी से प्रतिक्रिया उत्पन्न की और अधिकारी के खिलाफ कई धारा के तहत मामला दर्ज किया गया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- हैदराबाद के एसआई, पुझारी तीर्थपति, को अपनी 6‑साल की पोती को ड्राइव करवाते हुए पकड़ा गया।
- ऑफ़िसर ने दावा किया कि यह गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए प्रशिक्षण था।
- उन्हें भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 180, 184 के तहत बुक किया गया।
हैदराबाद शहर के नर्सिंगी इलाके में गंधमगुडा‑बैरागिगुडा रोड पर एक ऑटोमैटिक कार के सामने, एक छह साल की बच्ची को ड्राइवर की सीट पर देखा गया। वीडियो में स्पष्ट दिखता है कि बच्ची के पीछे कई वाहन रुक‑रुक कर हॉर्न बजा रहे हैं, जबकि कार के सामने का उपनिरीक्षक पुझारी तीर्थपति सामने की सीट पर बैठा था। इस दृश्य को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू की।
पृष्ठभूमि और घटना का विवरण
घटना का समय शनिवार शाम 5 बजे के आसपास बताया गया है। नर्सिंगी पुलिस इंस्पेक्टर जी. हरि कृष्णा रेड्डी ने पुष्टि की कि कार का पंजीकरण नंबर ‘TS 07 GP 7450’ पुझारी तीर्थपति के नाम पर था और उस पर पहले से ही छह ट्रैफिक चालान बकाया थे, जिनकी कुल राशि ₹3,800 थी। चालक को गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के तहत “दुनिया की सबसे छोटी ड्राइवर” बनवाने की तैयारी के बहाने से इस अनैतिक कार्य को न्यायसंगत ठहराने की कोशिश की गई।
कानूनी पहलू और संभावित दंड
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 (दूसरों के जीवन को खतरे में डालना) और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 180 (अनधिकृत व्यक्तियों को वाहन चलाने देना) तथा धारा 184 (खतरनाक ड्राइविंग) के तहत मामला दर्ज किया है। यदि सिद्ध हुआ तो पुझारी को 12 महीने के लिए वाहन पंजीकरण निलंबन, जुर्माना और एक साल तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, पोती को 25 वर्ष की आयु तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।
समाज और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
घटनाक्रम ने नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं में गहरी नाराज़गी उत्पन्न की। कई लोगों ने कहा कि यह न केवल ट्रैफ़िक सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के मनोवैज्ञानिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे ‘रिकॉर्ड‑की‑खोज’ को सार्वजनिक सुरक्षा के साथ नहीं जोड़ा जा सकता, और इसे रोकने के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता है।
भविष्य की संभावनाएँ
यह मामला भविष्य में बच्चों को वाहन चलाने से रोकने वाले कड़े नियमों की दिशा में एक चेतावनी बन सकता है। साथ ही, पुलिस विभाग के भीतर प्रशिक्षण और नैतिकता पर पुनः विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है, जिससे ऐसी लापरवाह घटनाएँ दोबारा न हों।