जम्मू और कश्मीर पुलिस की कंट्र‑इंटेलिजेंस इकाई ने दो विवादित पुस्तकों के प्रकाशन में शामिल तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। इन पुस्तकों को स्कूल लाइब्रेरी से हटाया गया था क्योंकि वे अलगाववादी और मिलिशिया नेताओं को नायक के रूप में प्रस्तुत करती थीं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • जम्मू‑कश्मीर में 3 प्रकाशकों को अलगाववादी‑संबंधी पुस्तकों के प्रकाशन हेतु गिरफ्तार किया गया।
  • ‘Personalities and Legends of J&K’ और ‘Great Personalities of Jammu and Kashmir’ को स्कूल लाइब्रेरी से हटाया गया।
  • भारी कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज, जिसमें UAPA की धारा 13 भी शामिल है।

जम्मू और कश्मीर पुलिस की कंट्र‑इंटेलिजेंस इकाई ने रविवार को तीन प्रकाशकों को गिरफ्तार किया, जो दो पुस्तकों के प्रकाशन और वितरण में शामिल थे, जिन पर आरोप है कि वे अलगाववादी और मिलिशिया नेताओं को महिमामंडित करती हैं। इस कार्रवाई के बाद, इन पुस्तकों को जम्मू, रामबन, उधमपुर और बारामुल्ला के स्कूल लाइब्रेरी से पूरी तरह हटाया गया।

पुस्तकों की सामग्री और विवाद

‘Personalities and Legends of J&K’ तथा ‘Great Personalities of Jammu and Kashmir’ शीर्षक वाली ये दो पुस्तकें कई स्कूलों में उपलब्ध थीं। समीक्षकों ने कहा कि इनमें जख्म बॉल (Maqbool Bhat) और शबीर शाह जैसे अलगाववादी नेताओं को शहीद या राष्ट्रीय नायक के रूप में चित्रित किया गया है, जिससे राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता को खतरा उत्पन्न होता है।

कानूनी कार्रवाई और दर्ज आरोप

जम्मू‑कश्मीर पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 49 (अपराध का समर्थन), 61(2) (अपराधी साजिश), 152 (देशभक्ति का उल्लंघन), 196 (विरोधी भावना को बढ़ावा), 353 (झूठी सूचना का प्रकाशन) और साथ ही अनैध गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13 के तहत केस दर्ज किया। कुल 251 प्रतियों का वितरण हुआ था, जिन्हें अब पूरी तरह से जब्त कर लिया गया है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और जांच

भाजपा, कांग्रेस और कई अन्य राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर तीखा विरोध जताया, यह दावा करते हुए कि ये पुस्तकें अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देती हैं। सरकार ने इस मामले की पूरी जाँच के लिए एक उच्च स्तर की जांच समिति का गठन किया है।

भविष्य की संभावनाएँ

जम्मू‑कश्मीर में इस प्रकार की सामग्री पर प्रतिबंध और प्रकाशकों के खिलाफ कठोर कदम उठाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। यह कदम न केवल शैक्षिक संस्थानों में सामग्री की जांच को कड़ा करेगा, बल्कि प्रकाशन उद्योग में स्व-सेल्फ रेगुलेशन की भी माँग करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशा में स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं बनते, तो भविष्य में अधिक पुस्तकें और शैक्षिक सामग्री लक्षित हो सकती हैं।