कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व केंद्रीय रेशम बोर्ड चेयरमैन एच. हनुमंठप्पा का रविवार को उम्र से जुड़ी बीमारी के कारण निधन हो गया। राज्य के कई प्रमुख राजनेता ने शोक व्यक्त किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- एच. हनुमंठप्पा, 94 वर्ष की आयु में निधन
- तीन बार राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय रेशम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष
- कर्नाटक के चितरदुर्गा से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
बेंगलुरु, 13 जुलाई 2026 – कर्नाटक के प्रतिष्ठित राजनेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य एच. हनुमंठप्पा का रविवार को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका निधन उम्र से जुड़ी बीमारी के कारण हुआ, जैसा कि परिवार ने पुष्टि की।
राजनीतिक सफर और उपलब्धियाँ
हिंदुस्तान के स्वतंत्रता संग्राम के बाद के दौर में हनुमंठप्पा ने कांग्रेस पार्टी में प्रवेश किया और धीरे‑धीरे अपनी राजनीतिक पकड़ स्थापित की। उन्होंने तीन बार (1992‑1998, 1998‑2004, 2004‑2010) राज्यसभा के सदस्य के रूप में देश के सर्वोच्च विधायी मंच पर सेवा की। अपने कार्यकाल में वे विशेषकर सामाजिक न्याय, अनुसूचित जातियों के अधिकार और ग्रामीण विकास के मुद्दों पर सक्रिय रहे।
केंद्रीय रेशम बोर्ड में योगदान
1995 में उन्हें केंद्रीय रेशम बोर्ड के चेयरमैन नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने भारत के रेशम उत्पादन को आधुनिक तकनीक, बीज सुधार और निर्यात‑उन्मुख नीतियों के माध्यम से पुनर्जीवित किया। उनके नेतृत्व में रेशम किसानों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच आसान हुई, जिससे कई ग्रामीण क्षेत्रों में आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
कर्नाटक में सामाजिक प्रभाव
चितरदुर्गा से कांग्रेस के प्रमुख चेहरा रहने वाले हनुमंठप्पा ने अनुसूचित जातियों के उत्थान के लिए कई सामाजिक योजनाओं को आगे बढ़ाया। उन्होंने स्थानीय स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और जलसंधारण परियोजनाओं में निवेश कर ग्रामीण जनजीवन में सुधार लाने का प्रयास किया। उनकी मृत्यु कर्नाटक की राजनीति में एक युग के अंत का संकेत देती है, जहाँ अनुभवी नेताओं की कमी महसूस की जा रही है।
शोक संदेश और प्रतिक्रिया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर शोक व्यक्त किया, “चितरदुर्गा के पूर्व सांसद, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और रेशम बोर्ड के पूर्व चेयरमैन एच. हनुमंठप्पा जी के निधन से गहरा शोक हुआ। उनका योगदान सदैव याद रहेगा।” कई पूर्व सहयोगी और विपक्षी नेताओं ने भी उनके सार्वजनिक जीवन को सम्मानित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
हनुमंठप्पा का निधन कर्नाटक के राजनीतिक परिदृश्य में एक खाली जगह छोड़ गया है, परन्तु उनका सामाजिक कार्य और नीतिगत योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।