लद्दाख सरकार ने सभी सात जिलों में हिल विकास परिषद स्थापित करने का फैसला किया, जिससे स्थानीय शासन को सुदृढ़ किया जा सकेगा। यह कदम बड़े क्षेत्रीय प्रशासन को अधिक नजदीकी बनाने और लोकतांत्रिक शक्ति को वितरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सभी सात जिलों में हिल विकास परिषद स्थापित की जाएगी
  • नई परिषदों को LAHDC अधिनियम की मौजूदा शक्तियों का उपयोग मिलेगा
  • संविधान में संशोधन के बाद एक विशिष्ट यूटी‑स्तरीय विधान निकाय का रूपरेखा तैयार होगी

लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कूंद्रा ने लेह में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) अधिनियम की धारा 3(1) पहले से ही प्रत्येक जिले में परिषद की व्यवस्था का प्रावधान रखती है। केवल कुछ छोटे संशोधनों के बाद यह प्रावधान सभी सात जिलों में लागू किया जाएगा।

पिछले दो दशकों की पृष्ठभूमि

1995 में लेह और 2003 में कारगिल में स्थापित LAHDC ने सीमित लेकिन प्रभावी स्थानीय शासन प्रदान किया। इन परिषदों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार नीतियों को लागू किया। हालांकि, 2024 में नई पांच जिलों—शाम, नुब्रा, चांगथांग, ज़ान्स्कार और द्रास—के निर्माण ने इन जिलों में समान अधिकारों की मांग को तेज कर दिया।

नए जिलों की मांग और उत्तर की प्रतिक्रिया

नव निर्मित जिलों की जनता ने लंबे समय से स्वायत्त जिला परिषद की माँग की थी, जिससे स्थानीय विकास को तेज किया जा सके। केंद्र सरकार ने अगस्त 2024 में इन जिलों को मान्यता दी, और अब लद्दाख में कुल सात जिले हो गए हैं। कूंद्रा ने कहा कि यह कदम "लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण" की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है और यह 60,000 वर्ग किलोमीटर के विस्तृत प्रदेश में प्रशासनिक पहुंच को बेहतर बनाएगा।

संवैधानिक बदलाव और यूटी‑स्तरीय विधान निकाय की संभावनाएँ

वर्तमान में एक विशिष्ट यूटी‑स्तरीय विधायी निकाय की रूपरेखा पर चर्चा चल रही है, जिसके लिए संविधान में परिवर्तन आवश्यक होगा। कूंद्रा ने बताया कि नई परिषदों के गठन के साथ, इस निकाय को विधायी, कार्यकारी, वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों का व्यापक दायरा दिया जाएगा। यह मॉडल लद्दाख की विशिष्ट भू-राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा, जिससे यह देश के किसी भी अन्य प्रदेश से अलग रहेगा।

आगे का मार्ग और संभावित प्रभाव

आगामी हफ्तों में लद्दाख प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के अधिकारियों के बीच एक ड्राफ्ट फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा, जिसमें अनुच्छेद 371 के तहत लद्दाख के लिए नई व्यवस्था का विवरण होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लद्दाख में विकास परियोजनाओं की गति को तेज करेगा, स्थानीय प्रतिनिधित्व को मजबूत करेगा और केंद्र‑राज्य संबंधों को संतुलित करेगा। साथ ही, यह नई संरचना भविष्य में अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में समान मॉडल अपनाने के लिए एक मिसाल बन सकती है।