कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने ईसीआई से विशेष पुनरावृत्ति (SIR) के दौरान हर मतदान केंद्र में पर्याप्त सुविधा केंद्र स्थापित करने, स्टाफिंग बढ़ाने और फॉर्म वितरण की समयसीमा बढ़ाने की मांग की। पार्टी ने कहा कि मौजूदा प्रशासनिक चूकें वास्तविक मतदाताओं को बाहर निकाल सकती हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के दौरान सुविधा केंद्रों की कमी पाई गई
  • कांग्रेस ने फॉर्म वितरण के लिए डेडलाइन बढ़ाने की मांग की
  • वृद्ध, दिव्यांग और ग्रामीण मतदाताओं के लिए विशेष सहायता की आवश्यकता पर बल दिया

बेंगलुरु, 13 जुलाई 2026 – कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को विशेष पुनरावृत्ति (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान मतदाता सुविधा केंद्रों को सुदृढ़ करने का आव्हान किया। KPCC के मीडिया और कम्युनिकेशन विभाग के अध्यक्ष एवं सदस्य परिषद (MLC) रमेश बाबू द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भेजे गये प्रतिनिधित्व में कहा गया कि कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने पर्याप्त सुविधा केंद्र स्थापित नहीं किए हैं, जिससे कई वैध मतदाता फॉर्म जमा नहीं कर पा रहे हैं।

पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

SIR प्रक्रिया का उद्देश्य चुनावी सूची में मौजूदा त्रुटियों को दूर करना और नई प्रविष्टियों को जोड़ना है। यह कार्य 30 जून से शुरू हुआ, जब बूथ लेवल अधिकारी (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाता फॉर्म वितरित करना शुरू किया। हालांकि, आधे से अधिक पात्र घरों को अभी तक फॉर्म नहीं मिला है, जिससे संभावित मतदाता बाहर छूटने का जोखिम बढ़ गया है। कांग्रेस ने कहा कि यह केवल मतदाता की लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

KPCC ने ECI से निम्नलिखित तत्काल कदमों की मांग की है:

  • हर मतदान केंद्र क्षेत्र में एक सुविधा केंद्र स्थापित करना और उसे पर्याप्त स्टाफ से सुसज्जित करना।
  • घर-घर फॉर्म वितरण को तब तक जारी रखना जब तक सभी पात्र घरों तक पहुँच न हो जाए।
  • फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि को तब तक बढ़ाना जब तक सभी मतदाता फॉर्म जमा न कर लें।

इसके अतिरिक्त, पार्टी ने राज्य स्तर पर निगरानी तंत्र, जिला शिकायत निवारण केंद्र, और जिला-वार फॉर्म वितरण व संग्रह की दैनिक प्रगति प्रकाशित करने की माँग की है। विशेष रूप से वृद्ध नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं के लिए अतिरिक्त सहायता की भी आवश्यकता पर बल दिया गया।

संभावित प्रभाव और भविष्य की दिशा

यदि इन मांगों को पूरा नहीं किया गया तो चुनावी सूची में वैध मतदाताओं की कमी से आगामी विधानसभा चुनावों में परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। यह मुद्दा केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है; देश भर में कई राज्य SIR प्रक्रिया के दौरान समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इसलिए, ECI के लिए यह अवसर है कि वह एक मॉडल बनाकर अन्य राज्यों के लिए दिशा-निर्देश स्थापित करे, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

विशेषज्ञों की राय

राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. अजय सिंह का मानना है कि “वोटर सुविधा केंद्रों की कमी से न केवल वैध मतदाताओं को बाहर किया जा सकता है, बल्कि चुनावी परिणामों की वैधता पर भी प्रश्न उठते हैं। यह समय है कि निर्वाचन आयोग तकनीकी और मानव संसाधनों दोनों में निवेश करे, ताकि हर नागरिक को अपना अधिकार सहजता से मिल सके।”