Save Brand HDMC Forum ने धारा द्वीप शहरों के भविष्य को खतरे में डालने वाले विभाजन प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। फोरम ने कहा कि दोहरी नगर निगम को तोड़ने से आर्थिक, सामाजिक और निवेश संबंधी कई नकारात्मक परिणाम उत्पन्न होंगे।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • विभाजन से नगर निगम की आर्थिक स्थिति कमजोर होगी
  • एकीकृत शहरी योजना में बाधा आएगी
  • भविष्य में निवेश और शहर की श्रेणी में गिरावट का जोखिम

हब्बली‑धरवाड़ नगर निगम (HDMC) के विभाजन को लेकर धड़ल्ले से बहस चल रही है। इस संदर्भ में, स्थानीय वकीलों, व्यापारियों और बौद्धिक वर्ग के प्रतिनिधियों द्वारा गठित Save Brand HDMC Forum ने रविवार को धरणवाड़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपना विरोध स्पष्ट किया। फोरम ने कहा कि दोहरी शहरों को अलग‑अलग नगरपालिका में बाँटना न केवल आर्थिक बोझ बढ़ाएगा बल्कि दीर्घकालिक विकास के अवसरों को भी घटाएगा।

फोरम के प्रमुख बिंदु

फोरम के वरिष्ठ वकील अरुण चरंतिमथ ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा के दोनों काउंसिलरों ने इस मुद्दे पर सोच‑समझ नहीं की। उन्होंने कहा कि धरणवाड़ को निधियों के वितरण में अनुचित व्यवहार करने का आरोप केवल कुछ व्यक्तियों का व्यक्तिगत मत है, न कि पूरे शहर की सामूहिक राय। इस बीच, केरल के मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार द्वारा बड़े बेंगलुरु के विस्तार की बातों को देखते हुए, HDMC का विभाजन तर्कहीन है, यह भी उन्होंने कहा।

आर्थिक जोखिम और निवेश पर प्रभाव

पूर्व मेयर हनुमंत डंबल ने विभाजन के वित्तीय असर को उजागर किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में HDMC को वेतन खर्चों के लिए लगभग ₹88 करोड़ की जरूरत है, जिसमें से राज्य सरकार ₹70 करोड़ प्रदान करती है, शेष ₹18 करोड़ आंतरिक संसाधनों से जुटाए जाते हैं। यदि विभाजन होता है तो धरणवाड़ की आय में से ₹35 करोड़ वेतन में चले जाएंगे, जिससे प्रत्येक वार्ड के विकास के लिए केवल ₹10 करोड़ ही बचेंगे—जो वर्तमान में लगभग ₹1.5 करोड़ के विकास बजट से बहुत कम है।

शहर की श्रेणी और व्यापारिक माहौल

विभाजन के कारण हब्बली‑धरवाड़ को ‘C’ श्रेणी के शहर में बदलने का खतरा है, जिससे बेंगलुरु, मैंगलूरु और मैसूर जैसे बड़े शहरों को निवेश आकर्षित करने का लाभ मिलेगा। यह न केवल स्थानीय उद्यमियों की प्रतिस्पर्धा को कमजोर करेगा, बल्कि राज्य और केंद्र की फंडिंग भी कम हो सकती है। स्थानीय विकास समूह जगदीश हिरेमथ ने कहा कि विभाजन से प्रशासनिक लागत में तीव्र वृद्धि और एकीकृत शहरी योजना में व्यवधान आएगा।

भविष्य की दिशा

फोरम ने मुख्यमंत्री शिवाकुमार और धरणवाड़ के इन‑चार्ज मंत्री सतीश जर्किहोली को एक विस्तृत मेमोरेंडम प्रस्तुत किया है, जिसमें हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में एक विशेष समिति की सिफारिश की गई है। इस समिति को विभाजन प्रस्ताव की पूरी समीक्षा करनी होगी। फोरम ने अंत में कहा कि दोहरी शहर को एक महानगर बनाने की मांग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि उसका विभाजन।