बनाजिगा और पंचामासली समुदायों के विधायक मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामैया को कैबिनेट विस्तार में अपनी प्रतिनिधियों को प्राथमिकता देने का आग्रह कर रहे हैं। मांग पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने पर वे बीडर‑श्रीरंगपटना राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध करने का प्रोटेस्ट करने की चेतावनी दे रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बनाजिगा और पंचामासली समुदायों के विधायक कैबिनेट में शामिल होने की मांग कर रहे हैं।
- मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामैया से अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
- यदि मांग पूरी नहीं हुई तो समुदाय बीडर‑श्रीरंगपटना राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध करने की कार्रवाई करेगा।
कर्नाटक के यादगिर में मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बनाजिगा और पंचामासली समुदायों के नेता चन्नु साहूकर वली ने राज्य कैबिनेट में अपने समुदाय के विधायकों को प्राथमिकता देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वे पहले ही मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामैया को अल्लामप्रभु पाटिल और विजयनंद कशप्पनवर जैसे प्रतिनिधियों को शामिल करने का आग्रह कर चुके हैं, पर अब तक कोई सकारात्मक उत्तर नहीं मिला।
समुदायों का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बनाजिगा और पंचामासली दोनों ही लिंगायत सामाजिक वर्ग के प्रमुख उपसमुदाय हैं, जिनका कर्नाटक के सामाजिक‑राजनीतिक परिदृश्य में लंबा इतिहास है। पिछले दशकों में इन समूहों ने कई बार अपने प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए विभिन्न मंचों पर आवाज़ उठाई है, क्योंकि सरकारी नौकरियों और राजनीतिक पदों में उनकी भागीदारी अक्सर कम रही है।
राजनीतिक संदर्भ
कर्नाटक में वर्तमान सरकार ने हाल ही में कैबिनेट को विस्तारित किया, लेकिन प्रमुख समुदायों की संतुलनकारी प्रतिनिधित्व की अपेक्षा बनी हुई है। विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों ने पहले भी कहा था कि छोटे व मध्यम वर्गीय समूहों को उचित स्थान नहीं दिया जा रहा है, जिससे सामाजिक असंतोष बढ़ रहा है। इस परिदृश्य में बनाजिगा‑पंचामासली का दबाव एक नया मोड़ ले रहा है।
प्रोटेस्ट की चेतावनी
यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो समुदाय बीडर‑श्रीरंगपटना राष्ट्रीय राजमार्ग के हत्तिगुड़ूर निकट एक ब्लॉक बनाने की योजना बना रहा है। यह राजमार्ग कर्नाटक के प्रमुख व्यापारिक मार्गों में से एक है, और इसका बाधित होना राज्य की आर्थिक गतिविधियों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इस प्रकार का सामुदायिक विरोध अक्सर सरकार को वार्ता की मेज पर लाता है।
भविष्य की संभावनाएँ
अखिला भारत बनाजिगा संघ के जिला अध्यक्ष बन्नप्पा सुनकड़ ने मुख्यमंत्री से सीधे अपील की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मुद्दा अब केवल एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का प्रश्न बन चुका है। यदि सरकार इस मांग को स्वीकार नहीं करती, तो कर्नाटक में सामाजिक तनाव बढ़ सकता है, जिससे आगामी चुनावों में वोटिंग पैटर्न पर असर पड़ने की संभावना है।
सामुदायिक नेताओं की यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि कर्नाटक में सामाजिक गठबंधन और राजनैतिक समीकरण समय के साथ निरन्तर विकसित हो रहे हैं, और किसी भी सरकार के लिए विविध समुदायों की संतुलित भागीदारी सुनिश्चित करना अब एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है।