दूसरे चरण की तैयारियों में खुला कॉलम खुला है, पर विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बिना मानकीकृत कोडिंग के डेटा अराजक हो सकता है। पिछले सर्वेक्षणों से मिली सीख को अपनाकर ही 2027 की जनगणना विश्वसनीय जाति आँकड़े दे सकेगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • खुला कॉलम बिना मानकीकृत कोडिंग के 46 लाख से अधिक विविधता पैदा कर सकता है।
  • पिछले सर्वेक्षणों ने दिखाया है कि मानकीकृत सूची से सटीक और तुलनात्मक डेटा संभव है।
  • एक विशेषज्ञ समिति को कोडिंग मानकों को तय करने के लिए गठित किया जाना चाहिए।

भारत सरकार ने 2027 की जनगणना के दूसरे चरण के अभ्यास में जातियों के रिकॉर्ड के लिए एक “ओपन कॉलम” जोड़ा है। जबकि आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि अंतिम कार्यप्रणाली परीक्षण के बाद तय होगी, पिछले अनुभव यह दर्शाते हैं कि बिना एकरूप कोडिंग सिस्टम के खुला टेक्स्ट उत्तर डेटा की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचा सकता है।

पिछले सर्वेक्षणों से मिली चेतावनी

2011 की सामाजिक‑आर्थिक एवं जाति जनगणना (SECC) में खुला कॉलम प्रयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 46 लाख से अधिक विभिन्न जाति प्रविष्टियाँ आईं। ये विविधताएँ वर्तनी‑भेद, क्षेत्रीय नाम, उप‑जातियां, समानार्थी शब्द और असंगत रिपोर्टिंग के कारण उत्पन्न हुईं, जिससे डेटा को वर्गीकृत करना और नीति‑निर्माण के लिए उपयोग करना लगभग असंभव हो गया।

संगठित प्रयासों की सफलताएँ

ऐतिहासिक रूप से, 1931 की जनगणना ने लगभग 4,147 जातियों को सूचीबद्ध किया, जबकि 1951 में भारतीय मानवशास्त्रीय सर्वेक्षण ने 6,325 जातियों की पहचान की। हाल के वर्षों में बिहार (2023) और तेलंगाना (2024) के सर्वेक्षणों ने क्रमशः 214 और 242 जातियों को मानकीकृत कोड के साथ दर्ज किया, जिससे दोहराव कम हुआ और डेटा की विश्वसनीयता बढ़ी। ये उदाहरण दिखाते हैं कि एक केंद्रीकृत, राज्य‑विशिष्ट और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत कोडिंग प्रणाली से सटीक गणना संभव है।

एक विशेषज्ञ समिति की आवश्यकता

जनगणना 2027 की कार्यप्रणाली को अंतिम रूप देने के लिए सरकार को एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन करना चाहिए। इस समिति को यह तय करना होगा कि कोडिंग फ्रेमवर्क किस स्रोत पर आधारित होगा: राज्य‑वार SC, ST, OBC सूचियाँ; राष्ट्रीय पिछड़े वर्ग आयोग की OBC सूची; भारतीय मानवशास्त्रीय सर्वेक्षण का जाति डेटाबेस; या इन सभी को मिलाकर एक राष्ट्रीय मास्टर सूची। साथ ही ऊपरी जातियों की पहचान के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाणपत्रों का उपयोग किया जा सकता है, जिससे मौजूदा प्रशासनिक डेटा को लाभ मिल सके।

व्यावहारिक सुझाव

ओपन कॉलम को केवल उन वास्तविक अनदेखी, नए जाति नामों या क्षेत्रीय भिन्नताओं को कैप्चर करने के लिए रखा जाना चाहिए। प्रत्येक जनगणकर्मी को मानकीकृत कोड वाली सूची उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि मान्य जातियों को समान रूप में दर्ज किया जा सके और डेटा की दोहराव घटे। इस प्रकार, 2027 की जनगणना भारत के स्वतंत्रता‑उपरांत पहली व्यापक जाति गणना बनने की संभावना रखती है, बशर्ते तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों को सही ढंग से संभाला जाए।