अंडरवॉटर (एक्वा) किसानों ने जलजमीनी नीति के खिलाफ भड़कीली विरोध प्रदर्शन किया, जबकि YSRCP के अध्यक्ष जगरनाथ ने सरकार को इस क्षेत्र को संकट में धकेलने का आरोप लगाया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • जगरनाथ ने कहा कि सिंडिकेट बीज, फीड से लेकर प्रोसेसिंग व मार्केटिंग तक सब नियंत्रित कर रहा है।
  • श्रमिकों को ₹230/kg श्रिंप की कीमत पर बेचना पड़ रहा है जबकि इनपुट लागत ₹275/kg है।
  • सरकार के एपीएसएडीए को कमजोर करने से फीड की लागत दो बार बढ़ी, जिससे 15 लाख लोगों की आजीविका संकट में।

आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले के भीमावाराम में आयोजित एक्वा किसानों की बैठक में YSRCP के अध्यक्ष यशविंदर राव जगरनाथ मोहन रेड्डी ने राष्ट्रीय गठबंधन (NDA) सरकार को ‘एक्वा क्षेत्र को संकट में धकेलने’ का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि एक्वा सिंडिकेट बीज, फीड, प्रसंस्करण और विपणन सभी चरणों में नियंत्रण रखता है, जिससे छोटे किसान लाभ के बजाय नुकसान में फँस रहे हैं।

पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ

आंध्र प्रदेश ने 2021‑22 और 2022‑23 वित्तीय वर्षों में ‘सर्वश्रेष्ठ समुद्री राज्य’ का खिताब जीता, तथा 2023‑24 में 51 लाख टन एक्वा व समुद्री उत्पादन दर्ज किया। यह राज्य भारत में जलजमीनी उत्पादन में अग्रणी रहा है, जहाँ पाँच लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में ब्रैकिशवॉटर और मीठे पानी की मछलीपालन होती है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में नीति‑निर्माताओं द्वारा लागू की गई ‘एंटी‑फ़ार्मर’ नीतियों ने इस सफलता को खतरे में डाल दिया है।

सरकारी नीतियों का प्रभाव

जगरनाथ ने बताया कि 2019‑24 के दौरान राज्य ने 3,306 करोड़ रुपये की पॉवर सब्सिडी दी, जबकि नई कनेक्शन के लिए 12,000 एक्वा किसानों के आवेदन ठहराए गए। इसके अलावा, एक्वा फार्मों को केवल सिंगल‑फेज़ बिजली मिल रही है, जबकि तीन‑फेज़ की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राज्य ने नर्सपुराम में स्थित ‘स्टेट एक्वाकल्चर यूनिवर्सिटी’ को क्यों बंद कर दिया, और ‘सुपर‑सिक्स’ अभिप्राय के तहत 5,000 टन कोल्ड स्टोरेज सुविधा जैसी प्रतिज्ञाएँ पूरी नहीं हुईं।

किसानों का प्रतिउत्तर और भविष्य की राह

रैली के दौरान किसानों ने सड़क पर झींगे फेंक कर जलते हुए दिखाया, जिससे फीड और इनपुट लागत में तीव्र वृद्धि का विरोध किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में श्रिंप का मूल्य ₹230 प्रति किलोग्राम है, जबकि उत्पादन लागत ₹275 प्रति किलोग्राम है, जिसमें 60% फीड लागत है। चार महीने में फीड लागत दो बार बिना किसानों की सहमति के बढ़ा दी गई। यह आर्थिक दबाव लगभग 15 लाख लोगों की आजीविका को खतरे में डाल रहा है, और 1.5 लाख एक्वा किसानों को विशेष रूप से प्रभावित कर रहा है।

आगे का रास्ता

जगरनाथ ने कहा कि उनका दल किसानों के साथ खड़े रहेगा और न्याय तक पहुँचने के लिये आंदोलन जारी रखेगा। उन्होंने राज्य सरकार से वादे की गई सब्सिडी, कोल्ड स्टोरेज, और एयरोटर जैसी सुविधाओं की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। यदि इन मुद्दों को हल नहीं किया गया, तो आंध्र प्रदेश की जलजमीनी उद्योग की प्रतिष्ठा और आर्थिक योगदान को गंभीर नुकसान हो सकता है।