भारत के केंद्रीय कबिनेट ने वाराणसी में दो विशाल एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट – गंगा कॉरिडोर और वरुणा कॉरिडोर – को 25,446 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी। इन परियोजनाओं से शहर के भारी ट्रैफ़िक को घटाना और प्रमुख धार्मिक‑शिक्षा‑सांस्कृतिक केन्द्रों को तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करना लक्ष्य है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- गंगा और वरुणा कॉरिडर के लिए 25,446 करोड़ रुपये की फंडिंग मंजूर
- दोनों कॉरिडर 100 किमी/घंटा की डिजाइन स्पीड वाले 6‑लेन एलिवेटेड हाईवे होंगे
- वाराणसी में यात्रा समय 60 मिनट से घटकर लगभग 20 मिनट तक लाएँगे
नई दिल्ली: भारत के केंद्रीय कबिनेट ने बुधवार को वाराणसी में दो महत्त्वपूर्ण एलिवेटेड रोड परियोजनाओं – गंगा कॉरिडर और वरुणा कॉरिडर – को स्वीकृति दी। 100 किमी/घंटा की डिजाइन गति के साथ 6‑लेन वाले ये हाईवे, मौजूदा 20 किमी/घंटा गति वाले मार्गों की तुलना में बहुत तेज़ रहेंगे, जिससे शहर के ट्रैफ़िक जाम में उल्लेखनीय कमी आएगी।
परियोजना की विस्तृत रूपरेखा
गंगा कॉरिडर 46 किमी लंबा होगा, जिसमें एक आइकॉनिक केबल‑स्टेड ब्रिज, फूटओवर ब्रिज‑कुम‑मुख्य पुल, लूप, रैंप, लिंक‑रोड और सर्विस‑रोड शामिल हैं। यह राष्ट्रीय राजमार्ग‑19 (प्रयागराज‑वाराणसी) तथा राष्ट्रीय राजमार्ग‑35 (वाराणसी‑मिर्ज़ापुर) के ट्रैफ़िक को डीकंजेस्ट करेगा। सरकार का अनुमान है कि इस कॉरिडर से यात्रा समय 60 मिनट से घटकर लगभग 20 मिनट रहेगा।
वरुणा कॉरिडर की अहमियत
43 किमी लंबा वरुणा कॉरिडर शहर के कोर को डीकंजेस्ट करने के साथ‑साथ राष्ट्रीय राजमार्ग‑31 से काशी रेलवे स्टेशन तक की यात्रा को 40 मिनट से घटाकर 20 मिनट कर देगा। दोनों कॉरिडर वाराणसी के प्रमुख धार्मिक स्थल – काशी विश्वनाथ मंदिर, नमो घाट, रामनगर किला, गंगा किनारे के घाट – तथा शैक्षिक संस्थान – बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) – को तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
वाराणसी सालाना 15 करोड़ से अधिक पर्यटक और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर का यह बड़ा विस्तार न केवल यात्रा को सुगम बनाएगा, बल्कि पुर्वांचल में औद्योगिक निवेश, पर्यटन आय और रोजगार सृजन को भी गति देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह मॉडल अन्य सांस्कृतिक महत्त्व वाले शहरों के लिए भी अनुकरणीय होगा।
इतिहासिक पृष्ठभूमि और भविष्य की दिशा
वाराणसी का इतिहास 3,000 साल से अधिक पुराना है, परंतु शहरी यात्रा की चुनौतियों ने हमेशा इसे परेशान किया है। पिछले दशक में कई छोटे‑बड़े सुधार हुए, परंतु ट्रैफ़िक की बढ़ती दबाव ने बड़े‑पैमाने की योजना की आवश्यकता पैदा की। गंगा‑वरुणा कॉरिडर का कार्यान्वयन शहर को 21वीं सदी की स्मार्ट‑सिटी मानकों के करीब लाएगा, साथ ही पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिये आधुनिक इको‑डिज़ाइन सिद्धांतों को भी अपनाएगा।