जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग के साथ एक रात का धरना रखा। लेखक ने स्वयं भी एक ‘कॉकरोच’ बन कर इस आंदोलन का प्रत्यक्ष अनुभव किया, जहाँ विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ आए।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • CJP ने 28 जून से जंतर-मंतर में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
  • सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया।
  • जंतर-मंतर का माहौल अब केवल राजनैतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामाजिक मिलन स्थल बन गया है।

जंतर-मंतर, नई दिल्ली का वह प्रतीकात्मक स्थान है जहाँ नागरिक अक्सर सत्ता से जवाबदेही की माँग करने आते हैं। 15 जुलाई 2026 को, लेखक ने इस मंच पर एक रात बिताने का निर्णय किया, क्योंकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ एक व्यापक आंदोलन शुरू किया था। यह आंदोलन न केवल छात्र संगठनों, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को भी समर्थन देता है।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

CJP ने 28 जून को जंतर-मंतर में अपना पहला धावा दर्ज किया, जब अभिजीत दिपके के नेतृत्व में एक छोटी सी भीड़ ने मंच पर आवाज़ उठाई। समय के साथ यह आंदोलन बढ़ता गया, विभिन्न विचारधाराओं के लोग—छात्र, पेशेवर, वरिष्ठ नागरिक—एक ही मंच पर इकट्ठे हुए। लेखक ने बताया कि वह पहले भी कई बार जंतर-मंतर आए थे, लेकिन इस बार वह पत्रकार नहीं, बल्कि स्वयं एक प्रदर्शनकारी बनकर रात भर की भीड़, सुरक्षा जांच और मंच के आसपास की जीवंत बातचीत को महसूस करना चाहता था।

वास्तविकता का निरिक्षण

जंतर-मंत्र के प्रवेश द्वार पर दिल्ली पुलिस के जवान ने एंटी‑सैबोटाज चेक किया, जिससे लेखक को भीड़ के पैटर्न के बारे में जानकारी मिली। शाम 5:30 बजे पहुंचते ही मंच पर कई प्लास्टिक की कुर्सियों पर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान तैनात थे, जबकि बाकी कुर्सियां खाली पड़ी थीं। वामपंथी छात्र संगठनों AISF, SFI और AISA ने गोल घेरा बनाकर बैठकर अपने नारे दोहराए, जबकि CJP के प्रमुख चेहरे मंच पर उपस्थित थे।

विविध दर्शकों की झलक

जाँचे गए दर्शक वर्गों में दफ़्तर से सीधे आए कामकाजी लोग, कॉलेज के छात्र, बुजुर्ग नागरिक और युवा जोड़े शामिल थे। कई लोग केवल फोटो खिंचवाने या इंस्टाग्राम रील बनाने में ही व्यस्त दिखे, जबकि कुछ ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर गहरी चर्चा की। यह स्पष्ट था कि जंतर-मंत्र अब केवल राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद का भी केंद्र बन गया है।

भविष्य की संभावनाएँ

जैसे-जैसे CJP का आंदोलन विस्तार पाता है, यह प्रश्न उठता है कि क्या यह व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक कदम होगा या केवल एक अल्पकालिक विरोध रहेगा। लेखक का निष्कर्ष है कि जंतर-मंत्र के इस रातभर के धरणे ने आंदोलन की जटिलताओं को उजागर किया है—भारी भीड़, सुरक्षा की चुनौतियां, और विभिन्न सामाजिक वर्गों की भागीदारी।