मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहे नेतृत्व संघर्ष पर तंज कसा है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे कांग्रेस को इतनी भी सीटें न दें कि वे मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी कर सकें।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस के आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व संघर्ष पर कड़ा प्रहार किया।
- मान ने कहा कि कांग्रेस नेता जनता के मुद्दों के बजाय मुख्यमंत्री पद के लिए लड़ रहे हैं।
- कांग्रेस में राजा वारींग, चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच खींचतान जारी है।
- मान ने शिरोमणि अकाली दल पर भी निशाना साधा और उन पर धर्म के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी की आंतरिक कलह को लेकर एक बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। होशियारपुर के मुकेरियां में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, मान ने तंज कसा कि पंजाब कांग्रेस वर्तमान में जनता के कल्याण के बजाय केवल नेतृत्व के संघर्ष में उलझी हुई है। उन्होंने मतदाताओं से आग्रह किया कि वे कांग्रेस को इतनी सीटें भी न दें कि वे मुख्यमंत्री चुनने की समस्या का सामना करें।
नेतृत्व की लड़ाई और गुटबाजी पर प्रहार
मान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे शक्ति संघर्ष का विस्तृत विवरण देते हुए कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाने में पूरी तरह विफल रहे हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, "राजा वारींग का चन्नी से नहीं बनता, चन्नी का बाजवा से नहीं बनता, बाजवा का रणधवा से नहीं बनता, और नवजोत सिंह सिद्धू तो किसी के साथ नहीं रहना चाहते।" मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता इस तरह व्यवहार कर रहे हैं जैसे राज्यपाल ने पहले ही मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह का समय तय कर दिया हो।
कांग्रेस बनाम आप: कल्याणकारी योजनाओं का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है, तो वह आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा शुरू की गई जन कल्याणकारी योजनाओं को बंद कर देगी। उन्होंने विशेष रूप से 'मावां दियां धीयां सतकार योजना' का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से 32 लाख से अधिक महिलाओं को वित्तीय सहायता मिल रही है। मान ने दावा किया कि कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य केवल पंजाब को "लूटने" का अवसर ढूंढना है।
अकाली दल पर भी साधा निशाना
कांग्रेस के साथ-साथ, मान ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने अकाली दल पर झूठे वादे करने और राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अकाली दल अब केवल रैलियों में भीड़ दिखाने के लिए "पेड वर्कर्स" का सहारा ले रहा है। हालांकि, अकाली दल ने भी पलटवार करते हुए मान सरकार पर कानून-व्यवस्था और sacrilege (बेअदबी) के मामलों को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया है।