तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मेकेडातु परियोजना के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दिए गए जवाब को भी वापस लेने की मांग की है।

मुख्य बातें

  • सीएम विजय ने मेकेडातु परियोजना को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप बनाने की मांग की।
  • राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री के जवाब को 'कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण' बताया गया।
  • तमिलनाडु ने निचले तटवर्ती राज्यों की सहमति को अनिवार्य बताया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर मेकेडातु परियोजना के संबंध में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री का तर्क है कि जब तक यह परियोजना कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) के निर्णय और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पूरी तरह अनुरूप नहीं हो जाती, तब तक इसे कोई भी वैधानिक या प्रशासनिक मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।

विजय ने राज्यसभा में 27 जुलाई को जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी द्वारा दिए गए जवाब पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। मंत्री ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले में कर्नाटक को संरचना बनाने से पहले निचले तटवर्ती राज्यों की सहमति लेने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। मुख्यमंत्री ने इस बयान को कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी करार दिया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, मेकेडातु मुद्दा केवल एक इंजीनियरिंग परियोजना नहीं है, बल्कि यह दक्षिण भारत के लाखों किसानों की जीवनरेखा का प्रश्न है। यदि केंद्र सरकार इस मामले में स्पष्ट रुख नहीं अपनाती है, तो अंतर-राज्यीय जल विवादों में कानूनी जटिलताएँ और बढ़ सकती हैं।

मेकेडातु परियोजना का कानूनी मूल्यांकन कावेरी न्यायाधिकरण के अंतिम निर्णय के संदर्भ में किया जाना अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में अलमट्टी मामले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया था कि निचले तटवर्ती राज्यों की सहमति अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कावेरी नदी केवल पानी का स्रोत नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत के करोड़ों लोगों की जीवन रेखा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मेकेडातु बांध परियोजना तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रही है। तमिलनाडु का तर्क है कि कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित बांध से कावेरी नदी के प्रवाह और निचले राज्यों को मिलने वाले पानी की मात्रा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

क्या आप जानते हैं?: कावेरी नदी को दक्षिण भारत की 'जीवन रेखा' कहा जाता है, जो तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के करोड़ों लोगों की कृषि और जीवन का आधार है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मेकेडातु विवाद का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य विवाद कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी पर बांध बनाने की योजना को लेकर है, जिससे तमिलनाडु के निचले इलाकों में पानी की कमी होने का डर है।

2. मुख्यमंत्री ने केंद्र से क्या मांग की है?
मुख्यमंत्री ने मांग की है कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करे कि परियोजना कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के नियमों का उल्लंघन न करे।