ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्याकांड से जुड़ी महत्वपूर्ण जांच रिपोर्ट के गायब होने के मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। यह मामला बीजू जनता दल शासन के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय से फाइलों के लापता होने से जुड़ा है।
मुख्य बातें
- स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्या मामले की ए.एस. नायडू आयोग रिपोर्ट गायब है।
- मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी।
- पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी aide सहित कई अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है।
- यह मामला 2008 के कंधमाल सांप्रदायिक हिंसा से गहरा जुड़ा है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से महत्वपूर्ण जांच आयोग रिपोर्ट के कथित रूप से गायब होने के मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। यह मामला बीजू जनता दल (BJD) के शासनकाल के दौरान का है, जब स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या से संबंधित संवेदनशील दस्तावेज लापता हो गए थे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ए.एस. नायडू आयोग की रिपोर्ट, जो स्वामी लक्ष्मणानंद हत्याकांड की जांच से जुड़ी थी, अब क्राइम ब्रांच के पास होगी। गौरतलब है कि ओडिशा पुलिस पहले से ही दो महत्वपूर्ण फाइलों के गायब होने की जांच कर रही थी: पहली, कंधमाल में संघ परिवार के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद की हत्या से जुड़ी फाइल, और दूसरी, भुवनेश्वर के SUM अस्पताल में लगी आग की घटना से संबंधित RDC स्तर की जांच रिपोर्ट।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल फाइलों के गायब होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के राजनीतिक इतिहास और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा है। 2008 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के बाद कंधमाल जिले में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी, जो ओडिशा के इतिहास में सबसे दुखद घटनाओं में से एक मानी जाती है।
संवेदनशील सरकारी दस्तावेजों का गायब होना संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जांच की गति बढ़ने के साथ, राज्य पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी सहयोगी वी. कार्तिकेय पांडियन, तत्कालीन मुख्य सचिव राजेश वर्मा और आईटी सचिव मनोज मिश्रा को पूछताछ के लिए तलब किया है। हालांकि, पांडियन के विदेश में होने और राजेश वर्मा के उपस्थित न होने के कारण जांच में कुछ बाधाएं भी आई हैं, लेकिन मनोज मिश्रा ने जांच टीम के सामने अपना पक्ष रखा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्ष 2008 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या ने ओडिशा के सामाजिक ताने-बाने को हिलाकर रख दिया था। इस घटना के बाद हिंदू और ईसाई समुदायों के बीच कंधमाल में भीषण हिंसा हुई थी। इस घटना ने तत्कालीन राजनीतिक समीकरणों को भी बदल दिया था, जिससे बीजू जनता दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच संबंध भी प्रभावित हुए थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. गायब हुई फाइल किस घटना से संबंधित है?
यह फाइल स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या की जांच करने वाले ए.एस. नायडू आयोग की रिपोर्ट से संबंधित है।
2. जांच अब कौन कर रहा है?
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच ओडिशा क्राइम ब्रांच द्वारा की जाएगी।