मैसूर जिले में विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत मतदाता सूची के डिजिटलीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें अब तक 75.85% फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं। प्रशासन ने सभी 27.99 लाख मतदाताओं तक फॉर्म पहुँचाने का लक्ष्य पूरा कर लिया है।

मुख्य बातें

  • मैसूर जिले में 75.85% मतदाता गणना फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं।
  • कुल 21,23,449 फॉर्मों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।
  • सभी 2,79,96,93 मतदाताओं को फॉर्म का वितरण 100% पूरा हो गया है।
  • चामुंडेश्वरी विधानसभा क्षेत्र डिजिटलीकरण में सबसे आगे है।

मैसूर: मैसूर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत चल रहे डिजिटलीकरण अभियान ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 29 जुलाई की शाम तक 75.85% गणना फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं, जिसमें कुल 21,23,449 फॉर्म शामिल हैं।

उपायुक्त और जिला निर्वाचन अधिकारी ने पुष्टि की है कि जिले के सभी 2,915 मतदान केंद्रों के अंतर्गत आने वाले सभी 27,99,693 मतदाताओं को गणना फॉर्म का वितरण 100% पूरा कर लिया गया है। यह घर-घर जाकर गणना और डिजिटलीकरण का कार्य 30 जून से शुरू होकर 8 अगस्त तक चलेगा।

डाटा सत्यापन और चुनौतियां

सत्यापन प्रक्रिया के दौरान, अधिकारियों ने 4,31,077 ऐसे फॉर्मों की पहचान की है जिन्हें एकत्र नहीं किया जा सका (15.40%)। इनमें 97,682 अनुपस्थित मतदाता, 1,05,416 स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता, 1,05,416 मृत मतदाता और 34,750 ऐसे मतदाता शामिल हैं जो पहले से ही कहीं और नामांकित हैं।

क्षेत्रवार प्रगति का विश्लेषण

विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में प्रगति अलग-अलग रही है। चामुंडेश्वरी विधानसभा ने 2,53,553 डिजिटाइज़्ड फॉर्मों के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। इसके बाद हुनसूर (2,16,991), वरुणा (2,04,217) और नरसिम्हाराजा (2,03,693) का स्थान है। अन्य सभी क्षेत्रों में भी काम निरंतर जारी है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण से चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी और फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने में मदद मिलेगी, जिससे भविष्य के चुनावों में धांधली की गुंजाइश कम होगी।

डिजिटल मतदाता सूची न केवल चुनाव प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करती है, बल्कि यह लोकतंत्र की शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में मतदाता सूची का नवीनीकरण एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, लेकिन हाल के वर्षों में 'डिजिटल इंडिया' पहल के तहत इसे पूरी तरह से पेपरलेस बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि डेटा की सटीकता सुनिश्चित की जा सके।

क्या आप जानते हैं?: मैसूर के इस अभियान के तहत एक ही दिन में लाखों डेटा पॉइंट्स को डिजिटल सर्वर पर अपलोड किया जा रहा है ताकि चुनाव आयोग के पास सटीक डेटा रहे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: मैसूर में डिजिटलीकरण का कार्य कब तक पूरा होगा?
उत्तर: यह प्रक्रिया 8 अगस्त तक चलने की संभावना है।

प्रश्न 2: डिजिटलीकरण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना है।