कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में ईवीएम (EVM) सत्यापन प्रक्रिया का बहिष्कार करने का निर्णय लेते हुए डीएमके ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। पार्टी अब इस मामले को अदालत में ले जाने की तैयारी कर रही है।
मुख्य बातें
- डीएमके ने कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में ईवीएम सत्यापन प्रक्रिया का बहिष्कार किया है।
- पार्टी का दावा है कि जांचे गए 30% मशीनों में विसंगतियां पाई गई हैं।
- एमके स्टालिन के निर्वाचन क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
- डीएमके मद्रास उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती है।
तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने शनिवार को घोषणा की कि वह कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में उपयोग की गई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के सत्यापन में भाग नहीं लेगी। यह वही क्षेत्र है जहाँ पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने चुनाव लड़ा था। पार्टी का आरोप है कि मशीनों की सुरक्षा में गंभीर चूक हुई है।
डीएमके के वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आर. इलंगो ने मीडिया को बताया कि अब तक आठ ईवीएम का सत्यापन किया गया है, जिनमें से तीन में विसंगतियां पाई गई हैं। उन्होंने कहा, "चूंकि जांचे गए लगभग 30% मशीनों में समस्याएं मिली हैं, इसलिए हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि चुनाव निष्पक्ष रूप से नहीं कराए गए थे। हम इसे वैज्ञानिक और कानूनी रूप से साबित करने का प्रयास करेंगे।"
विवाद का मुख्य कारण
विवाद का केंद्र मतदान केंद्र संख्या 157 की मशीनें हैं। अधिवक्ता इलंगो के अनुसार, मशीनों पर लगे एड्रेस टैग नए और अप्रयुक्त लग रहे थे। उन्होंने बताया कि सामान्यतः इन टैग्स को एम्बर सील (amber seals) से सुरक्षित किया जाता है। हालांकि, सत्यापन के लिए लाई गई मशीनों में एम्बर सील केवल सामने की ओर पाई गई, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
"चुनाव अधिकारियों ने इसे मानवीय भूल बताया है, लेकिन हम इस स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि यह सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।"
BozokMedia विश्लेषण
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, ईवीएम की सुरक्षा और सीलिंग प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की विसंगति लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गहरा प्रभाव डालती है। यदि डीएमके अदालत में यह साबित करने में सफल रहती है कि सील के साथ छेड़छाड़ हुई है, तो यह चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
Frequently Asked Questions
1. डीएमके ने सत्यापन का बहिष्कार क्यों किया?
पार्टी का आरोप है कि जांचे गए 30% ईवीएम में विसंगतियां मिली हैं और मशीनों की सुरक्षा में चूक हुई है।
2. अगला कदम क्या हो सकता है?
डीएमके इस मामले को मद्रास उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में ले जाने की योजना बना रही है।