केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चेन्नई में आयोजित उत्सव में कहा कि शैव तिरुमुराइज ने तमिल साहित्य को आम जनता तक पहुँचाया और इसे विद्वानों के दायरे से बाहर निकालकर जन-जन का बनाया।

मुख्य बातें

  • शैव तिरुमुराइज ने तमिल साहित्य को आम लोगों के लिए सुलभ बनाया।
  • कर्नाटक संगीत के कई रागों की जड़ें तिरुमुराइज के 'पन्न' (Panns) में निहित हैं।
  • ये ग्रंथ केवल धार्मिक नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज भी हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चेन्नई में आयोजित 34वें वार्षिक दैव सेक्किज़ार महोत्सव में शिरकत करते हुए तमिल सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। उन्होंने कहा कि शैव तिरुमुराइज ने तमिल साहित्य का लोकतंत्रीकरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे भक्ति साहित्य केवल विद्वानों तक सीमित न रहकर आम जनता के दिलों और आवाजों तक पहुँच सका।

महोत्सव के दौरान, वित्त मंत्री ने दो महत्वपूर्ण पुस्तकें—'द पन्निरु तिरुमुराइज' और 'थिरुचेन्दुर स्थल पुराणम'—का विमोचन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये 12 तिरुमुराइज भगवान शिव की स्तुति करने के लिए सरल तमिल में पर्याप्त हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आज के कर्नाटक संगीत मंचों पर गाए जाने वाले कई शास्त्रीय रागों का मूल स्रोत तिरुमुराइज के 'पन्न' (Panns) में पाया जाता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वित्त मंत्री का यह बयान न केवल सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि यह भारत की भाषाई और आध्यात्मिक जड़ों को आधुनिक शासन के साथ जोड़ने का एक प्रयास है। तिरुमुराइज जैसे ग्रंथ केवल धार्मिक रचनाएँ नहीं हैं, बल्कि वे प्राचीन संगीत और इतिहास के सेतु हैं।

शैव तिरुमुराइज ने तमिल साहित्य को विद्वानों के एकाधिकार से मुक्त कर उसे आम जनमानस की संपत्ति बना दिया।

सिटरामन ने इन ग्रंथों को अमूल्य ऐतिहासिक अभिलेखागार के रूप में भी वर्णित किया। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे 'पेरियपुराणम' में सेक्किज़ार ने राजा महेंद्र पल्लव के शैव धर्म में परिवर्तन का विवरण दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे ये ग्रंथ मंदिर शिलालेखों और ऐतिहासिक घटनाओं जैसे राजा राजसिम्हा पल्लव के काल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

क्या आप जानते हैं?

क्या आप जानते हैं?: तिरुमुराइज में वर्णित 'पन्न' (Panns) ही आधुनिक कर्नाटक संगीत के विभिन्न रागों के पूर्वज माने जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. शैव तिरुमुराइज क्या हैं?
ये तमिल साहित्य के 12 पवित्र ग्रंथ हैं जो भगवान शिव की भक्ति पर आधारित हैं और तमिल संगीत व साहित्य के आधार स्तंभ हैं।

2. वित्त मंत्री ने किन पुस्तकों का विमोचन किया?
उन्होंने 'द पन्निरु तिरुमुराइज' और 'थिरुचेन्दुर स्थल पुराणम' का विमोचन किया।