कोलकाता की सड़कों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने श्रमिकों के उत्पीड़न और रेहड़ी-पटरी वालों के निष्कासन को लेकर राज्य सरकार और पुलिस पर निशाना साधा है।
मुख्य बातें
- कांग्रेस ने कोलकाता में 'लालबाजार सत्याग्रह' मार्च निकाला।
- श्रमिकों पर अत्याचार और रेहड़ी-पटरी वालों को हटाए जाने का आरोप।
- राज्य सरकार पर पुलिस का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप।
- पुलिस बैरिकेड्स के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फूल और चॉकलेट भेंट की।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बुधवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने कोलकाता पुलिस मुख्यालय (लालबाजार) की ओर कूच करते हुए एक विशाल विरोध मार्च निकाला। इस मार्च का उद्देश्य श्रमिकों पर हो रहे अत्याचारों, रेहड़ी-पटरी वालों (hawkers) के जबरन निष्कासन और छात्रों के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई का विरोध करना था।
विरोध का मुख्य कारण
कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष शुभंकर सरकार के नेतृत्व में यह मार्च कॉलेज स्ट्रीट से शुरू होकर लालबाजार तक गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 21 जुलाई के शहीद दिवस रैली के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया था, लेकिन अब तक दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वरिष्ठ नेता सुमन रॉय चौधरी ने कहा कि पुलिस मंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की जा रही है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
मार्च के दौरान कांग्रेस नेताओं ने राज्य की वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोला। शुभंकर सरकार ने कहा कि सरकार बदलने के बावजूद पुलिस की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अब कानून की रक्षा करने के बजाय भाजपा कार्यकर्ताओं के एजेंडे को लागू करने का जरिया बन गई है।
"अगर पुलिस अपने कर्तव्य का पालन करने के बजाय राजनीतिक एजेंडे पर काम करेगी, तो राज्य में कानून का शासन समाप्त हो जाएगा।" - शुभंकर सरकार
BozokMedia विश्लेषण
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण चरम पर है। कांग्रेस द्वारा 'फूल और चॉकलेट' देने का प्रतीकात्मक विरोध यह दर्शाता है कि वे सीधे टकराव के बजाय नैतिक दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष उन्हें 'अप्रासंगिक' बताकर खारिज कर रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कोलकाता में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों की एक लंबी परंपरा रही है। 21 जुलाई की रैलियां राज्य की राजनीति में मील का पत्थर मानी जाती हैं, और इन घटनाओं के दौरान होने वाली हिंसा अक्सर राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को बदल देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. कांग्रेस का यह मार्च कहाँ से कहाँ तक था?
यह मार्च कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट से शुरू होकर लालबाजार (पुलिस मुख्यालय) तक निकाला गया था।
2. सत्ता पक्ष की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
भाजपा नेता शरदद मुखर्जी ने कहा है कि कांग्रेस अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए नए तरीके खोज रही है।