तमिलनाडु के वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन ने बजट पेश करते हुए कहा कि राज्य को वित्तीय संकट से उबारने और राजकोषीय अनुशासन लाने में कम से कम दो साल लगेंगे। उन्होंने पिछली सरकार पर अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए भारी कर्ज लेने का आरोप लगाया है।
मुख्य बातें
- नई सरकार को राजकोषीय अनुशासन बहाल करने के लिए 2 साल का समय चाहिए।
- राज्य पर ₹10.98 लाख करोड़ का बकाया कर्ज है।
- सरकार ने राजस्व वृद्धि के माध्यम से अब तक ₹1,500 करोड़ जुटाए हैं।
- कल्याणकारी योजनाओं को 'निवेश' माना जाएगा, न कि केवल खर्च।
चेन्नई में विधानसभा में संशोधित बजट 2026-27 पेश करते हुए, वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन ने स्वीकार किया कि राज्य की वित्तीय स्थिति वर्तमान में दबाव में है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली नई सरकार को एक ऐसा खजाना विरासत में मिला है जो भारी कर्ज, अपर्याप्त आय और प्रणालीगत लीकेज (leakages) से जूझ रहा है।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वित्तीय प्रशासन को वापस पटरी पर लाने और राजकोषीय विवेक (fiscal prudence) सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इसमें कम से कम दो साल का समय लगेगा। उन्होंने पिछली सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे केवल पांच साल के कार्यकाल के भीतर अल्पकालिक राजनीतिक लाभ पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे, जबकि वर्तमान सरकार का लक्ष्य अगले 15 वर्षों के निरंतर विकास पर केंद्रित है।
यह क्यों मायने रखता है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति में यह बदलाव राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। यदि सरकार ऋण के बोझ को कम करने और राजस्व स्रोतों को मजबूत करने में सफल रहती है, तो यह भविष्य में बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।
हमारी सरकार का मानना है कि हमें निरंतर नीतियों और स्वच्छ शासन के माध्यम से कम से कम 15 वर्षों के सतत विकास की ओर देखना चाहिए।
बजट के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि राज्य का कुल बकाया कर्ज लगभग ₹10.98 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने राजस्व कमाने वाले विभागों को अनियंत्रित रूप से नुकसान होने दिया और बिचौलियों को सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने की अनुमति दी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तमिलनाडु लंबे समय से भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में से एक रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते लोकलुभावन वादों और भारी ऋण लेने की प्रवृत्ति ने राज्य की वित्तीय सेहत पर सवाल खड़े किए हैं। वर्तमान सरकार का ध्यान अब 'कल्याणकारी योजनाओं' और 'भौतिक पूंजी' के बीच संतुलन बनाने पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: वित्त मंत्री ने राजकोषीय अनुशासन के लिए कितना समय मांगा है?
उत्तर: वित्त मंत्री के अनुसार, वित्तीय प्रशासन को पटरी पर लाने के लिए कम से कम दो साल की आवश्यकता होगी।
प्रश्न 2: क्या कल्याणकारी योजनाएं बंद कर दी जाएंगी?
उत्तर: नहीं, सरकार कल्याणकारी योजनाओं को निवेश मानती है, लेकिन वे भौतिक बुनियादी ढांचे के विकास के साथ एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाएंगी।