केरल सरकार ने विधानसभा चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने के लिए EVM हैकिंग का झांसा देकर उम्मीदवारों से पैसे ऐंठने के आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन की शिकायत के बाद गृह मंत्री ने साइबर सेल को जांच सौंपी है।
मुख्य बातें
- EVM हैकिंग का झांसा देकर उम्मीदवारों से धन वसूली का आरोप।
- कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत।
- केरल गृह मंत्री ने साइबर ऑपरेशन्स विंग को जांच के निर्देश दिए।
- कसारगोड, उडुमा और मनजेरम निर्वाचन क्षेत्रों में घोटाले की आशंका।
केरल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने 2026 की विधानसभा चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को 'हैक' करने का वादा करके उम्मीदवारों को ठगने के गंभीर आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। यह कदम कांग्रेस नेता और सांसद राजमोहन उन्नीथन द्वारा राज्य पुलिस को शिकायत सौंपने के बाद उठाया गया है।
कसारगोड में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मिली शिकायत के बाद, गृह मंत्री रमेश चन्नाथला ने साइबर ऑपरेशन्स विंग को इस मामले की गहन जांच करने का निर्देश दिया है। आरोप है कि चुनाव से पहले, एक व्यक्ति ने कासरगोड, उडुमा और मनजेरम निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस उम्मीदवारों को निशाना बनाया।
धोखाधड़ी का तरीका
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने दावा किया कि 'भाजपा EVM हैक करने की योजना बना रही है' और उसके पास इसे रोकने तथा अनुकूल परिणाम सुनिश्चित करने के लिए एक 'विशेष तकनीक' है। इस फर्जी सुरक्षा का झांसा देकर, उसने उम्मीदवारों से भारी मात्रा में धन की मांग की। बताया जा रहा है कि कासरगोड और उडुमा के उम्मीदवारों ने कथित तौर पर पैसे दे दिए, जबकि मनजेरम के उम्मीदवार ने इनकार कर दिया।
क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के आरोप न केवल चुनावी अखंडता पर सवाल उठाते हैं, बल्कि मतदाताओं के विश्वास को भी हिला सकते हैं। यदि इस तरह की धोखाधड़ी का कोई भी हिस्सा सच पाया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा देगा।
EVM हैकिंग के ये आरोप चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करते हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।
इस मामले में पूर्व वाकफ बोर्ड सीईओ के नाम का उपयोग करने का भी आरोप है। पूर्व एलडीएफ उम्मीदवार शानवास पादुर ने भी समान आरोप लगाए हैं, जिसमें कहा गया है कि एक व्यक्ति ने उनके पक्ष में EVM हेरफेर करने का वादा करके पैसे मांगे थे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में EVM की सुरक्षा हमेशा से बहस का विषय रही है। हालांकि चुनाव आयोग ने बार-बार कहा है कि मशीनें पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन राजनीतिक दल अक्सर तकनीकी खामियों या हैकिंग की आशंकाओं का मुद्दा उठाते रहे हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या वास्तव में EVM हैक की गई है?
अभी तक केवल आरोप लगाए गए हैं और सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है।
प्रश्न 2: जांच कौन कर रहा है?
केरल सरकार के साइबर ऑपरेशन्स विंग को इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया है।