सीपीआई(एम) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन प्रक्रिया से अलग रखा जाए। पार्टी का कहना है कि विपक्ष इस बिल का समर्थन करने को तैयार है यदि इसे स्वतंत्र रूप से लाया जाए।

मुख्य बातें

  • सीपीआई(एम) महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने का विरोध कर रहा है।
  • पार्टी का दावा है कि केंद्र ने विपक्षी दलों के साथ पर्याप्त परामर्श नहीं किया है।
  • विपक्ष महिला आरक्षण विधेयक का अलग से समर्थन करने को तैयार है।
  • बीजेपी पर विपक्ष को रोकने वाला दिखाने का आरोप लगाया गया है।

विजयवाड़ा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, सीपीआई(एम) नेता बी.वी. राघवुलु ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित महिला आरक्षण कानून को परिसीमन (delimitation) प्रक्रिया के साथ न जोड़ा जाए। राघवुलु के अनुसार, यदि सरकार महिला आरक्षण विधेयक को स्वतंत्र रूप से पेश करती है, तो विपक्षी दल इसका समर्थन करने के लिए तैयार हैं।

राघवुलु ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जानबूझकर यह धारणा बनाने की कोशिश कर रही है कि विपक्षी दल महिला सशक्तिकरण के कानून में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन के मुद्दे पर अभी कोई आम सहमति नहीं बनी है और केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विपक्षी दलों के साथ उचित विचार-विमर्श नहीं किया है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि महिला आरक्षण और परिसीमन का जुड़ाव भारत के संघीय ढांचे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को गहराई से प्रभावित कर सकता है। यदि इन दोनों को एक साथ लाया जाता है, तो दक्षिण भारतीय राज्यों और उत्तर भारतीय राज्यों के बीच सीटों के वितरण को लेकर एक बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हो सकता है।

"महिला आरक्षण का उद्देश्य सशक्तिकरण है, इसे परिसीमन की जटिलताओं के साथ बांधना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित कर सकता है।"

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, राघवुलु ने नई दिल्ली में हुए 'जेन ज़ी' (Gen Z) विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को छात्रों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और पुलिस द्वारा बल प्रयोग की आलोचना करते हुए गृह मंत्री अमित शाह से संसद में इस पर बयान देने की मांग की।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में परिसीमन एक संवेदनशील प्रक्रिया है जो जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्गठन से जुड़ी है। महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) दशकों से लंबित था, लेकिन अब इसके कार्यान्वयन को परिसीमन की समयसीमा से जोड़ दिया गया है, जो राजनीतिक गलियारों में बहस का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

क्या आप जानते हैं?: भारत में परिसीमन आयोग का गठन मुख्य रूप से जनसंख्या में बदलाव के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण के लिए किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सीपीआई(एम) की मुख्य मांग क्या है?
सीपीआई(एम) चाहता है कि महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन प्रक्रिया से अलग रखा जाए ताकि आरक्षण का लाभ बिना किसी देरी के मिल सके।

2. परिसीमन विवाद का क्या कारण है?
परिसीमन से राज्यों की जनसंख्या के आधार पर सीटों की संख्या बदल सकती है, जिससे कुछ राज्यों का राजनीतिक प्रभाव कम होने का डर है।