तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट से जुड़े तीन विधायकों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हुए हमले की निंदा करते हुए उनके प्रति समर्थन जताया है, जिससे पार्टी में उनके पुनर्मिलन की अटकलें तेज हो गई हैं।

मुख्य बिंदु

  • ऋतब्रत बनर्जी गुट के तीन विधायक—तौसीफ-उर-रहमान, अब्दुल खालिक मोल्लाह और बिभास सरदार ने ममता बनर्जी का समर्थन किया।
  • मुख्यमंत्री के काफिले पर हुए कथित हमले के बाद बागी विधायकों ने 'कालीघाट टीएमसी' के नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
  • विधायक तौसीफ-उर-रहमान ने स्वीकार किया कि ममता बनर्जी के बिना उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता शून्य है।
  • ऋतब्रत बनर्जी ने इस घटनाक्रम को खारिज करते हुए अपने गुट की संख्या 65 होने का दावा किया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल हुए तीन विधायकों ने अचानक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की है। यह घटनाक्रम तब हुआ जब हाल ही में हलीशहर में मुख्यमंत्री के काफिले पर पत्थरबाजी और कीचड़ फेंकने की घटना सामने आई।

बसीरहाट नॉर्थ के विधायक तौसीफ-उर-रहमान ने भावुक होते हुए कहा कि दीदी के बिना वह अपने क्षेत्र में 10 वोट भी नहीं पा सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए तृणमूल कांग्रेस का अर्थ केवल ममता बनर्जी हैं। वहीं, बारुईपुर ईस्ट के विधायक बिभास सरदार ने पार्टी की एकता पर जोर देते हुए कहा कि सभी विधायक 'जोड़ा फूल' चिह्न के तहत जीते हैं, इसलिए उन्हें एकजुट होना चाहिए।

Why This Matters (यह क्यों महत्वपूर्ण है)

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना दिखाती है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर चाहे कितनी भी गुटबाजी क्यों न हो, अंतिम शक्ति केंद्र अभी भी केवल ममता बनर्जी ही हैं। बागी विधायकों का यह यू-टर्न संकेत देता है कि ऋतब्रत बनर्जी का 'समानांतर शक्ति केंद्र' बनने का सपना कमजोर पड़ रहा है। यह राजनीतिक दबाव की स्थिति है जहाँ विधायक अपनी चुनावी जीत को बचाने के लिए वापस मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं।

"बंगाल की राजनीति में व्यक्तिगत करिश्मा संस्थागत ढांचे पर भारी पड़ता है, और ममता बनर्जी का व्यक्तित्व टीएमसी की सबसे बड़ी पूंजी है।"

दूसरी ओर, बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने इन दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब्दुल खालिक मोल्लाह अभी भी उनके साथ हैं और उनके गुट की संख्या 65 है। उन्होंने चुनौती दी कि यदि 'कालीघाट गुट' को अपनी संख्या पर भरोसा है, तो वे आधिकारिक दावा पेश करें।

क्या आप जानते हैं?: टीएमसी का 'जोड़ा फूल' (Twin Flowers) चुनाव चिह्न पार्टी की पहचान बन चुका है, जिसे ममता बनर्जी ने पार्टी के विस्तार के लिए रणनीतिक रूप से उपयोग किया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कौन से विधायक ममता बनर्जी की ओर वापस लौट रहे हैं?
उत्तर: तौसीफ-उर-रहमान, अब्दुल खालिक मोल्लाह और बिभास सरदार ने हाल ही में ममता बनर्जी के प्रति समर्थन जताया है।

प्रश्न 2: इस बदलाव का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हुए हमले के विरोध में इन विधायकों ने कालीघाट टीएमसी के नेताओं के साथ मिलकर प्रदर्शन किया, जिससे उनकी घर वापसी की चर्चा शुरू हुई।