राज्यसभा ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है, जिससे अब सहकारी समितियों को सीधे ऋण और अनुदान देने का मार्ग प्रशस्त होगा। इस बिल के माध्यम से केंद्र सरकार सहकारी क्षेत्र के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

  • NCDC अब सहकारी समितियों को सीधे ऋण और अनुदान प्रदान कर सकेगा।
  • 'खाद्य पदार्थों' की परिभाषा में अब प्रोसेस्ड फूड भी शामिल होगा।
  • देश में 8 लाख से अधिक सहकारी समितियां और 30 करोड़ सदस्य हैं।
  • विधेयक को राज्यसभा द्वारा ध्वनि मत से पारित किया गया।

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए, राज्यसभा ने बुधवार को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली में सुधार करना और उनके वित्तीय सशक्तिकरण के लिए केंद्र की भूमिका को विस्तारित करना है।

इस विधेयक को लोकसभा में मंगलवार को पारित किया गया था। राज्यसभा में इसे सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से पेश किया। इस संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब NCDC सहकारी समितियों को सीधे ऋण और अनुदान देने के लिए अधिकृत होगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हो सकती है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संशोधन भारत के विशाल सहकारी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विधेयक में 'खाद्य पदार्थों' की परिभाषा को संशोधित किया गया है ताकि इसमें प्रोसेस्ड फूड और केंद्र द्वारा अधिसूचित अन्य खाद्य वस्तुएं भी शामिल हो सकें। इससे कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण (processing) और विपणन (marketing) में सहकारी समितियों की क्षमता बढ़ेगी।

यह संशोधन सहकारी क्षेत्र के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधे वित्तीय शक्ति प्रदान करने का एक रणनीतिक प्रयास है।

सदन में चर्चा के दौरान, विपक्षी दलों ने केंद्र के बढ़ते हस्तक्षेप पर सवाल उठाए। BJD सांसद सुलता देव ने तर्क दिया कि यह राज्यों और गांवों की शक्ति छीनने जैसा है। वहीं, AIADMK के एम थंबीदुराई ने आग्रह किया कि केंद्र सरकार को राज्यों के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि संघीय ढांचे का सम्मान बना रहे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मूल राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 को कृषि उत्पादों, औद्योगिक वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण और निर्यात/आयात के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से कार्यक्रम चलाने हेतु स्थापित किया गया था। 2026 का यह संशोधन इस 64 साल पुराने ढांचे को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप ढालने का प्रयास है।

क्या आप जानते हैं?: भारत में वर्तमान में 8 लाख से अधिक सहकारी समितियां सक्रिय हैं, जो लगभग 30 करोड़ सदस्यों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. NCDC संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य सहकारी समितियों को सीधे वित्तीय सहायता प्रदान करना और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उनके दायरे को बढ़ाना है।

2. इस विधेयक पर विपक्ष की क्या आपत्ति थी?
विपक्ष का मुख्य तर्क यह था कि यह विधेयक सहकारी शक्ति को राज्यों से लेकर केंद्र सरकार के हाथों में केंद्रित कर सकता है।