बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने नए खनन संशोधन विधेयक 2026 को ओडिशा के संसाधनों और वित्तीय अधिकारों के लिए खतरा बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से इस मुद्दे पर तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
मुख्य बातें
- नवीन पटनायक ने नए खनन विधेयक को ओडिशा की वित्तीय स्वायत्तता के लिए 'खतरा' बताया।
- विधेयक के कारण खनिज संपन्न राज्यों को भारी राजस्व हानि होने की आशंका है।
- बीजेडी ने विधानसभा के विशेष सत्र और सर्वदलीय बैठक की मांग की है।
- केंद्र द्वारा नियम बनाने की शक्ति अपने हाथ में लेने पर विरोध जताया गया।
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने संसद द्वारा पारित 'खनिज और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पटनायक ने इस विधेयक को ओडिशा के संवैधानिक अधिकारों और उसके प्राकृतिक संसाधनों पर एक सीधा हमला करार दिया है।
पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखे एक पत्र में चेतावनी दी है कि यह विधेयक खनिज संपन्न राज्यों को असमान रूप से प्रभावित करेगा। उनका तर्क है कि इससे राज्य के विकास कार्यों के लिए आवश्यक राजस्व में भारी कमी आएगी, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद भारत के संघीय ढांचे (Federalism) के केंद्र में है। यदि राज्य अपनी खनिज संपदा पर कर लगाने की शक्ति खो देते हैं, तो उनकी आर्थिक स्वतंत्रता सीमित हो जाएगी। यह मुद्दा केवल ओडिशा का नहीं, बल्कि झारखंड जैसे अन्य खनिज समृद्ध राज्यों का भी है, जहाँ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस विधेयक को 'काला विधेयक' बताया है।
"ओडिशा की प्राकृतिक संपदा उसके लोगों की है, और खनन से प्राप्त राजस्व राज्य के कल्याण के लिए अनिवार्य है।" - नवीन पटनायक
विधेयक के प्रमुख विवादास्पद प्रावधानों में केंद्र सरकार को नियम बनाने का एकमात्र अधिकार देना और राज्यों की खनिजों पर कर लगाने की शक्ति को सीमित करना शामिल है। बीजेडी प्रमुख ने इसे राज्यों की स्वायत्तता पर एक बड़ा प्रहार बताया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में खनिज संसाधनों का प्रबंधन दशकों से केंद्र और राज्यों के बीच साझा अधिकार रहा है। हालांकि, हालिया संशोधनों के माध्यम से केंद्र की भूमिका बढ़ती जा रही है, जिससे राज्यों और केंद्र के बीच शक्ति संतुलन को लेकर बहस छिड़ गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. बीजेडी का मुख्य विरोध क्या है?
बीजेडी का कहना है कि नया विधेयक राज्यों को उनके अपने खनिजों पर कर लगाने से रोकता है, जिससे राजस्व की हानि होगी।
2. झारखंड सरकार की क्या प्रतिक्रिया है?
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे 'काला विधेयक' कहा है और व्यापक विरोध प्रदर्शनों की चेतावनी दी है।