सबरिमाला मंदिर के प्रधान तंत्रि कंदरारु राजीवरु ने स्वास्थ्य कारणों से पद त्यागने की इच्छा जताते हुए अपने पुत्र कंदरारु ब्रह्मदत्तन को उत्तराधिकारी के रूप में प्रस्तावित किया। यह कदम उनके जनवरी 2026 में की गई गिरफ़्तारी और चल रहे स्वर्ण चोरी के मामले से जुड़ी जाँच के बाद आया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कंदरारु राजीवरु ने तंत्रि पद से इस्तीफा दिया
- उनके बेटे को उत्तराधिकारी के रूप में प्रस्तावित किया गया
- यह निर्णय स्वर्ण चोरी मामले की जाँच के बाद आया
केरल के पथानाम्थिट्टा में स्थित सबरिमाला अय्यप्पा मंदिर, भारतीय धर्मस्थलों में अपना एक विशेष स्थान रखता है। इस मंदिर का प्रधान तंत्रि, कंदरारु राजीवरु, ने 11 जुलाई 2026 को त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड (TDB) को एक आधिकारिक पत्र लिखकर अपना पद त्यागने की इच्छा व्यक्त की। पत्र में उन्होंने अपने स्वास्थ्य को मुख्य कारण बताया और अपने पुत्र कंदरारु ब्रह्मदत्तन को अपने स्थान पर नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा।
पृष्ठभूमि और कानूनी संदर्भ
राजीवरु को 9 जनवरी 2026 को विशेष जांच टीम (SIT) ने सबरिमाला स्वर्ण चोरी के मामले में आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया था। जांच में यह आरोप है कि उन्होंने मंदिर की स्वर्ण-आवरणीय वस्तुओं के निकालने और पुनः स्थापित करने में भाग लिया, जिसमें प्रमुख आरोपी उन्निकृष्णन पोटी का भी उल्लेख है। लगभग 40 दिनों की जमानत के बाद उन्हें 18 फरवरी को कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने रिहा किया। अब तक वह तंत्रि के रूप में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में भाग नहीं ले पाए हैं, जबकि उनका पुत्र कई कार्यक्रमों में उनका प्रतिनिधित्व कर रहा है।
परम्परागत उत्तराधिकार का अनुसरण
राजीवरु द्वारा अपने पुत्र को उत्तराधिकारी के रूप में प्रस्तावित करना पहले हुए एक समान उदाहरण पर आधारित है, जब कंदरारु महेश मोहनारु को उनके पिता के पद से अयोग्य घोषित होने के बाद प्रधान तंत्रि नियुक्त किया गया था। यह प्रथा मंदिर प्रशासन में पारिवारिक उत्तराधिकार को सुदृढ़ करती है, परन्तु न्यायालय की मंजूरी के बिना कोई भी नियुक्ति आधिकारिक नहीं मानी जाएगी। त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड के अध्यक्ष के. जयाकुमार ने कहा कि इस प्रस्ताव पर उच्च न्यायालय की सहमति के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
आगे का मार्ग और संभावित प्रभाव
सबरिमाला तीर्थयात्रा का मौसम अभी चल रहा है, और तंत्रि के पद पर अस्थायी परिवर्तन से श्रद्धालुओं और प्रशासन दोनों पर असर पड़ सकता है। यदि ब्रह्मदत्तन को तंत्रि नियुक्त किया जाता है, तो यह न केवल धार्मिक स्थिरता प्रदान करेगा, बल्कि राजीवरु के स्वास्थ्य एवं कानूनी चुनौतियों को भी कम करेगा। दूसरी ओर, यह कदम न्यायिक प्रक्रिया के साथ तालमेल बिठाते हुए धार्मिक स्वतंत्रता की सीमाओं को भी परीक्षण में लेता है।