सैंट्रल जांच टीम (SIT) ने राम मंदिर के दान संग्रह प्रणाली में गंभीर प्रक्रिया त्रुटियों का खुलासा किया। रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू ने बिना लिखित अनुमति के हंडियों की चाबियाँ संभाली और अपने रिश्तेदार को नकद गिनती टीम में शामिल किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- टिन्नू ने बिना लिखित आदेश के दान बॉक्स की चाबियाँ रखी
- पर्यवेक्षण और CCTV रिकॉर्डिंग में गंभीर लापरवाही
- सात लोगों के खिलाफ प्रारम्भिक आपराधिक आरोप
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर चल रहे दान चोरी के मामले में सैंट्रल जांच टीम (SIT) ने प्रमुख आरोपियों में से एक, रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, की भूमिका को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, टिन्नू ने कई हंडियों (दान बॉक्स) की चाबियाँ अपने पास रखी, जबकि उसे ऐसा करने का कोई लिखित आदेश या आधिकारिक अनुमति नहीं मिली थी।
पृष्ठभूमि और प्रशासनिक लापरवाही
राम मंदिर का निर्माण भारत के इतिहास में एक प्रतीकात्मक मील का पत्थर माना जाता है, और इसके साथ जुड़ी निधि सार्वजनिक दान के माध्यम से एकत्रित की जाती है। इस प्रकार के बड़े पैमाने पर धन प्रवाह को सुरक्षित रखने के लिए कड़े बैंक और ऑडिट मानक लागू होते हैं। SIT की रिपोर्ट ने कहा कि केवल एक व्यक्ति को चाबियों की पूर्ण जिम्मेदारी देना, बिना किसी दस्तावेज़ी प्रोटोकॉल, जवाबदेही या निगरानी के, “एक गंभीर प्रशासनिक चूक” है।
रिश्तेदार को पद पर नियुक्ति
जाँच में यह भी सामने आया कि टिन्नू ने अपने रिश्तेदार मनिष कुमार यादव को दान गिनती टीम में शामिल करने की सिफ़ारिश की। इस टीम को नकद की गिनती, वर्गीकरण और बैंक जमा प्रक्रिया का जिम्मा सौंपा गया है, जिससे उनका सीधे तौर पर धन प्रवाह में हस्तक्षेप की संभावना बढ़ जाती है। investigators ने इस अनुशंसा को “धोखाधड़ी की संभावनाओं को बढ़ाने वाला” बताया।
सुरक्षा और निगरानी में खामियाँ
रिपोर्ट ने कई सुरक्षा चूकों को भी उजागर किया, जैसे कि CCTV कैमरों की निगरानी में कमी, रिकॉर्डिंग को 45 दिन के बाद हटाना जबकि ऑडिट ने 180 दिन रखने की सिफ़ारिश की थी, और बैंक के अनिवार्य प्रोटोकॉल का उल्लंघन। इन खामियों ने दान को ट्रैक करने और संभावित गबन को रोकने की क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर किया।
आरोपित व्यक्तियों और संभावित दंड
अब तक एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर SIT ने अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनिष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्रा के खिलाफ “दुर्लभ चोरी, आपराधिक गबन और भरोसे की तोड़‑फोड़” के प्रारम्भिक आरोप लगाए हैं। यदि जांच आगे बढ़ती है, तो इन पर भारतीय दंड संहिता के तहत कठोर दंड हो सकता है।
यह मामला न केवल धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित करता है, बल्कि सार्वजनिक निधियों की सुरक्षा के लिए सख्त नियामक ढाँचे की मांग भी करता है।