आयुक्त राम मंदिर में दान चोरी के मामले में आठ गिरफ्तार हुए लोगों से जुड़े 20 रिश्तेदारों की जमीन खरीद की जानकारी विभागीय राजस्व रिकॉर्ड से हासिल करने की पुलिस ने मांग की है। जांच में अब तक बरामद नकद, आभूषण और वाहन भी शामिल हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पुलिस ने 20 रिश्तेदारों/सहयोगियों की जमीन खरीद की जांच शुरू की है।
  • आठ गिरफ्तार हुए लोगों में से छह ने मंदिर दान की गिनती में सीधे भाग लिया।
  • जमा की गई नकद, आभूषण और वाहनों का स्रोत चोरी हुए धन से जुड़ा माना जा रहा है।

अयोध्या के विश्व‑प्रसिद्ध राम मंदिर में हर महीने दो मिलियन से अधिक श्रद्धालु आते हैं, जहाँ दान के रूप में जमा की गई धनराशि को अत्यधिक सुरक्षा के साथ संभाला जाता है। हाल ही में इस व्यवस्था में दरार दिखी, जब आठ लोगों को दान की गिनती और नकद चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

जांच की नई दिशा

पुलिस ने अब इस मामले के विस्तार में कदम बढ़ाते हुए, आठ गिरफ्तार हुए लोगों के 20 करीबी रिश्तेदारों और सहयोगियों की भूमि खरीद रिकॉर्ड की जाँच के लिए जिला राजस्व विभाग को निर्देशित किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि प्रारंभिक जांच में बरामद नकद, आभूषण और कई वाहन ऐसे स्रोतों से जुड़े दिखे जिन्हें चोरी हुए धन से खरीदा गया माना जा रहा है।

मुख्य आरोपी और उनका किरदार

गिरफ्तारी में शामिल लोगों में राम शंकर यादव (उपनाम टिनु यादव), रामशंकर मिश्रा, सुबेश श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव और करुणेश पांडे शामिल हैं। टिनु यादव, जो ट्रस्ट के पूर्व जनरल सेक्रेटरी के ड्राइवर थे, और सुबेश श्रीवास्तव, जो दान गिनती कक्ष के पर्यवेक्षक थे, को इस मामले में प्रमुख भूमिका निभाने का संकेत मिला है। बाकी छः आरोपियों को सीधे दान की गिनती में देखा गया।

राजस्व रिकॉर्ड और रियल एस्टेट लेन‑देन

पोलिस ने स्थानीय संपत्ति दलालों से पूछताछ की है और यह पता लगाने की कोशिश की है कि क्या इन गिरफ्तार लोगों ने हाल ही में कोई अचल संपत्ति खरीदी है। एक अधिकारी ने कहा, “हम यह स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं कि चोरी हुए धन को कहाँ निवेश किया गया। अब तक हमने नकद, आभूषण और वाहन बरामद किए हैं, लेकिन अचल संपत्ति के संबंध में स्पष्ट सबूत अभी नहीं मिले हैं।”

भविष्य की कार्यवाही

जांच के दौरान, पुलिस ने सुबेश श्रीवास्तव और टिनु यादव को सात दिन की हिरासत में रखने के लिए स्थानीय अदालत से अनुमति मांगी है। साथ ही, राजस्व विभाग की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि चोरी के पीछे कोई बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट लेन‑देन जुड़े हैं या नहीं। इस जांच से यह भी पता चल सकता है कि भविष्य में मंदिर दानों की सुरक्षा को कैसे मजबूत किया जाए।