आयोध्या में स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रमुख कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। सुप्रीम कोर्ट की जांच के बीच यह भर्ती प्रक्रिया 18 जुलाई शाम 4 बजे तक खुली रहेगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- आयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट ने सीईओ पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए
- आवेदन की अंतिम तिथि 18 जुलाई, शाम 4 बजे
- सुप्रीम कोर्ट की जांच के बीच पद की महत्ता बढ़ी
नई दिल्ली – श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सीईओ पद के लिए योग्य उम्मीदवारों को आवेदन करने का आह्वान किया है। यह कदम आयोध्या में चल रहे दान के दुरुपयोग के आरोपों के बीच उठाया गया है, जिससे ट्रस्ट की पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पद की आवश्यकताएँ और चयन प्रक्रिया
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि इच्छुक उम्मीदवारों को कम से कम स्नातक होना चाहिए और प्रशासन या वित्त में 20 वर्षों का अनुभव होना अनिवार्य है। मंदिर प्रबंधन में पूर्व अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी और सभी आवेदकों को हिंदू धर्म के अनुयायी होना चाहिए। चयन समिति ने पात्रता मानदंड तय कर लिए हैं और एक सचिव को भी नियुक्त किया गया है जो भर्ती प्रक्रिया की निगरानी करेगा।
सुप्रीम कोर्ट की जांच का प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और आयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है, ताकि दान के संभावित दुरुपयोग की स्वतंत्र, न्यायालय‑निगरानी वाली जाँच सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) को अपने कार्य‑विवरण और सदस्यता की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इस संदर्भ में, ट्रस्ट द्वारा सीईओ की नियुक्ति को प्रशासनिक उत्तरदायित्व को स्पष्ट करने और सार्वजनिक विश्वास को पुनर्स्थापित करने का अवसर माना जा रहा है।
भर्ती का समय‑सारणी और पद की जिम्मेदारियाँ
आवेदन 4 pm, 18 जुलाई तक स्वीकार किए जाएंगे। चयन प्रक्रिया के बाद शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों का साक्षात्कार अगले महीने के भीतर किया जाएगा, और सफल उम्मीदवार को प्रारम्भिक तीन‑वर्षीय कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जाएगा। नियुक्त सीईओ को आयोध्या में स्थायी रूप से रहना होगा और वह मंदिर के दैनिक संचालन, वित्तीय प्रबंधन, तथा कर्मचारियों के समन्वय की देखरेख करेगा।
भविष्य की संभावनाएँ
यह नियुक्ति न केवल दान‑संदेह के समय में ट्रस्ट की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करेगी, बल्कि आयोध्या में धार्मिक‑पर्यटन के प्रबंधन को भी व्यवस्थित करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई नेतृत्व टीम पारदर्शी प्रक्रियाओं को अपनाती है, तो भविष्य में समान विवादों की संभावना कम हो जाएगी।