अयोध्या के राम मंदिर प्रबंधित करने वाले राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह पद केवल 50‑70 वर्ष के बीच के सक्रिय हिंदू और राम भक्तों के लिये खुला है, जिसमें 20 साल का प्रबंधन अनुभव अनिवार्य है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • राम मंदिर ट्रस्ट ने पहला सीईओ नियुक्त करने का निर्णय लिया।
  • आवेदनकर्ता को 50‑70 वर्ष के बीच, प्रैक्टिसिंग हिंदू और राम भक्त होना चाहिए।
  • उम्मीदवार को प्रशासन, वित्त, आईटी, सुरक्षा आदि में 20 वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है।

अयोध्या में स्थित राम मंदिर का प्रबंधन करने वाला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 14 जुलाई को अपने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के लिए आवेदन आमंत्रित किए। यह कदम तब आया जब ट्रस्ट के भीतर नकद‑गणना एजेंटों पर दान में चोरी का आरोप लगा, जिससे संस्थान की पारदर्शिता और संचालन में सुधार की आवश्यकता स्पष्ट हुई।

पद के लिए निर्धारित मानदंड

ट्रस्ट ने स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया है कि उम्मीदवार को 50 से 70 वर्ष के बीच का स्नातक होना चाहिए और "एक सक्रिय प्रैक्टिसिंग हिंदू" होना अनिवार्य है। वैष्णव परम्परा का राम भक्त होना अतिरिक्त गुण माना जाएगा। इस पद की अवधि तीन वर्ष की होगी और अंतिम तिथि 18 जुलाई निर्धारित की गई है।

व्यावसायिक योग्यता की मांग

आवेदनकर्ता को बड़े सार्वजनिक संस्थान, सरकारी विभाग या निजी कंपनी में कम से कम 20 वर्ष का प्रबंधन अनुभव होना चाहिए। यह अनुभव प्रशासन, वित्त, मानव संसाधन, सार्वजनिक संबंध, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और कानूनी मामलों में व्यापक होना चाहिए। टेम्पल या किसी हिन्दू धार्मिक संस्था के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य करने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

पिछले घोटालों के बाद नियामक कदम

जुलाई 6 को आयोजित बैठक में छह नकद‑गणना एजेंटों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्होंने दान बॉक्सों से नकद, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की चोरी का आरोप लगाया गया। उसी बैठक में पूर्व महा सचिव चम्पत राय और वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े को स्वीकार किया गया, जबकि कृष्ण मोहन को अंतरिम महा सचिव नियुक्त किया गया। इन घटनाओं के बाद ट्रस्ट ने एक स्वतंत्र खोज समिति का गठन किया, जिसमें एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज, एक सेवानिवृत्त LG और एक पूर्व परमाणु वैज्ञानिक शामिल हैं।

भविष्य की संभावनाएँ और चुनौतियाँ

सीईओ की नियुक्ति से राम मंदिर के दैनिक संचालन में मानक संचालन प्रक्रियाएँ, प्रबंधन प्रणाली और पारदर्शी प्रोटोकॉल स्थापित होने की उम्मीद है। यह कदम न केवल दान के दुरुपयोग को रोकने में मदद करेगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन को व्यवस्थित करने और आर्थिक लाभ को स्थानीय समुदाय तक पहुँचाने में भी सहायक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही उम्मीदवार चुना गया, तो यह निर्णय भारत में बड़े धार्मिक संस्थानों के पेशेवर प्रबंधन की दिशा में एक मील का पत्थर बन सकता है।