चीनी वैज्ञानिकों की नई अध्ययन ने बताया कि तिब्बत में बन रहे ब्रह्मपुत्र मेगा डैम के नीचे सक्रिय फॉल्ट लाइन मौजूद है, जिससे बड़े भूकंप की स्थिति में डैम की सुरक्षा जोखिम में पड़ सकती है। इस चेतावनी से भारत, बांग्लादेश और क्षेत्रीय जल सुरक्षा पर सवाल उठे हैं।

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • डैम के नीचे सक्रिय पाईझेन (Paizhen) फॉल्ट लाइन मौजूद है
  • भूकंप के जोखिम से डैम, सुरंग और जलाशय की संरचनात्मक स्थिरता खतरे में
  • सुरक्षा उपायों में पहाड़ी ढलानों को सुदृढ़ करना और भू-स्खलन रोकथाम प्रणाली शामिल

तिब्बत के मिलिन क्षेत्र में चीन ने 167.8 अरब डॉलर की लागत वाला ब्रह्मपुत्र मेगा डैम 2025 में शुरू किया, जिसका लक्ष्य हर साल 300 मिलियन किलोवॉट‑घंटे से अधिक बिजली उत्पादन करना है। यह परियोजना, जो विश्व के सबसे बड़े जलविद्युत प्रोजेक्टों में से एक कहलाती है, हिमालय की गहरी घाटी से गुजरते हुए भारत के अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित है।

विज्ञानियों की नई चेतावनी

चीन के चेंगदू यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और चीन जियोलॉजिकल सर्वे के भूवैज्ञानिकों ने हाल ही में एक अध्ययन प्रकाशित किया, जिसमें बताया गया कि डैम के निकट पाईझेन फॉल्ट लाइन कई दशकों से सक्रिय है। इस फॉल्ट लाइन के कारण टेक्टोनिक प्लेटों की निरंतर गति से स्थानीय चट्टानों में दरारें और कमजोरियां उत्पन्न हो रही हैं, जिससे बड़े भूकंप और संभावित लैंडस्लाइड की संभावना बढ़ रही है।

ऐतिहासिक और भू‑भौतिक संदर्भ

पाईझेन क्षेत्र में 2017 में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जो इस फॉल्ट लाइन की सक्रियता को स्पष्ट करता है। भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराव वाले इस क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि सामान्य है, और पिछले दशकों में कई छोटे‑मध्यम भूकंप दर्ज किए गए हैं। ऐसी भू‑भौतिक स्थितियों में बड़े जलभवन का निर्माण अत्यधिक जोखिमपूर्ण माना जाता है, क्योंकि एक बार फेल होने पर विस्फोटक जल प्रवाह नीचे के देशों—भारत और बांग्लादेश—पर विनाशकारी प्रभाव डाल सकता है।

भौगोलिक-राजनीतिक प्रभाव

डैम का पूरा करने से चीन को जल संसाधनों पर रणनीतिक नियंत्रण मिलेगा, जबकि भारत और बांग्लादेश जल अधिकारों के लिए चिंतित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डैम की सुरक्षा में कोई कमी आती है, तो इसके परिणामस्वरूप निचले प्रवाह में जल स्तर में अचानक परिवर्तन, बाढ़ या सूखा जैसी आपदाएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस कारण अंतरराष्ट्रीय जल कानून और दोबारा वार्ता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।

आगे के कदम और सिफ़ारिशें

वैज्ञानिकों ने डैम के आस‑पास के पहाड़ी ढलानों को सुदृढ़ करने, लैंडस्लाइड रोकथाम के लिए आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करने और आपातकालीन जल निकासी मार्ग तैयार करने की सिफ़ारिश की है। साथ ही, चीन को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्वतंत्र भू‑भौतिक मूल्यांकन करवाने की अपील की गई है, जिससे निचले देशों को संभावित जोखिमों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

जब तक इन सुरक्षा उपायों को लागू नहीं किया जाता, तब तक इस मेगा प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता और स्थिरता पर संदेह बना रहेगा।