18‑वर्षीय अरनव पापरकर ने विंबलडन में भारतीय जूनीयर टेनिस के इतिहास को फिर से लिखते हुए क्वार्टर‑फ़ाइनल में प्रवेश किया। यह उपलब्धि 1990 में लेनदर पायस के बाद 36 साल बाद आई है, जिससे भारतीय टेनिस की नई पीढ़ी को बड़ी प्रेरणा मिली है।
लंदन के विंबलडन चैम्पियनशिप में 18‑साल के अरनव विजय पापरकर ने भारतीय टेनिस के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा। इस साल अपने अंतिम जूनीयर सीज़न में प्रवेश करते हुए, उन्होंने जापान के रियो तबाटा को 6‑2, 6‑1 से हराकर क्वार्टर‑फ़ाइनल में जगह बनाई। यह जीत 1990 में लेनदर पायस के बाद 36 साल में पहली बार भारतीय खिलाड़ी द्वारा जूनीयर सिंगल्स क्वार्टर‑फ़ाइनल में पहुंचने की उपलब्धि को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि और विकास मार्ग
पापरकर ने अपने करियर की शुरुआत भारत के स्थानीय अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स से की, फिर एशियाई सर्किट में कदम रखा और धीरे‑धीरे उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुँचा। इस साल उन्होंने पहली बार ग्रैंड स्लैम जूनीयर इवेंट्स में भाग लिया, जहाँ उनके क्रमिक सुधार ने उन्हें विश्व रैंकिंग में 19वें स्थान तक पहुंचाया।
मैच का विश्लेषण
पापरकर ने अपने सर्विस में असाधारण प्रदर्शन किया, दो सेट में कुल आठ एसेस लगाते हुए 25 में से 23 पॉइंट पहले सर्व से जीते। उनका तेज़ सर्व 208 km/h तक पहुंचा, जबकि औसत गति 196 km/h रही। प्रतिद्वंद्वी तबाटा, जो शारीरिक रूप से अस्थिर दिख रहा था, सर्व में कई त्रुटियां कर रहा था, जिससे पापरकर ने अवसरों का बेहतर उपयोग किया। पापरकर ने कहा, “मैच मेरे दिमाग में था, मैं फिर से हार नहीं मान सकता। अब मैं मानसिक रूप से बहुत शांत हूँ।”
कोचिंग और प्रशिक्षण
अर्जेंटीना के कोच हेमंत बेंद्रे और स्पेन के सोटो अकादमी में नाइजेले बेवर्स के मार्गदर्शन में पापरकर ने अपना सर्व सुधार किया। बेंद्रे ने अप्रैल में उसके स्विंग को धीमा और फुलर बनाने की सलाह दी, जिससे चोटों की संभावना कम हुई और रिद्म में स्थिरता आई। पापरकर के दो प्रशिक्षण केंद्र—पुणे और स्पेन—उसकी तकनीकी और शारीरिक तैयारी को संतुलित करते हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
क्वार्टर‑फ़ाइनल में पापरकर का सामना अमेरिकी क्वालिफायर जॉर्डन ली से होगा, जिससे वह अपनी पिछली दो मुलाक़ातों की हार को उलटने की कोशिश करेगा। यदि वह आगे बढ़ता है, तो वह भारतीय टेनिस के इतिहास में युकी भाम्ब्री (2009) के बाद दूसरा जूनीयर ग्रैंड स्लैम क्वार्टर‑फ़ाइनल विजेता बन जाएगा। इस उपलब्धि से युवा खिलाड़ियों में आशा जगी है और भारतीय टेनिस संघ को नई रणनीतियों के लिए प्रेरणा मिलेगी।