कोच गौतम गैम्बीर के कार्यकाल में भारत का हालिया विदेश टूर दो बड़े झटके में बदल गया – आयरलैंड में 2‑0 हार और इंग्लैंड के खिलाफ 76 सभी आउट। इन दो हानियों ने टीम की रणनीति और चयन‑नीति पर सवाल उठाए हैं।
भारत की क्रिकेट टीम ने पिछले दो दशकों में विदेशी पिचों पर अपनी पकड़ मजबूत की थी। 2008 के बाद से श्रीलंका में कोई टेस्ट श्रृंखला नहीं हारी, ऑस्ट्रेलिया (2019, 2021) में लगातार जीत हासिल की और इंग्लैंड के खिलाफ 2‑2 बराबरी भी हासिल की। फिर भी, इस साल की टूर ने इस छवि को धूमिल कर दिया।
आयरलैंड में 2‑0 हार
जुलाई 2026 में आयरलैंड में आयोजित दो टी‑20 मैचों में भारत ने 2‑0 से हार का सामना किया। टीम की टॉप ऑर्डर, विशेषकर सान्जु सैमसन, लगातार कम स्कोर (5, 0, 1) बनाते रहे, जिससे मध्य‑क्रम में दबाव बढ़ गया। कोच गौतम गैम्बीर ने वैभव सूर्यावंशी को अचानक शामिल किया, पर यह बदलाव भी तुरंत असर नहीं कर सका।
इंग्लैंड में 76 सभी आउट
इंग्लैंड के खिलाफ तीसरा टी‑20 मैच भारत के लिए एक बुरी दुविधा बन गया। शुरुआती ओवर में लगातार विकेट गिरने के कारण टीम 76 रन पर ही समाप्त हो गई। यह स्कोर भारत के इतिहास में सबसे कम टी‑20 अंतरराष्ट्रीय स्कोरों में से एक है, और इसने टीम की बॅटिंग रणनीति पर गंभीर प्रश्न उठाए।
सुर्यावंशी का चयन और विवाद
वैभव सूर्यावंशी, 15‑ वर्षीय बिहार के prodigy, ने IPL 2026 में 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप जीता था। उसकी तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता के बीच, भारत ने उसे आयरलैंड‑इंग्लैंड श्रृंखला में तेजी से शामिल किया। कई विशेषज्ञों ने कहा कि यह दबाव की स्थिति में युवा खिलाड़ी को जल्द‑बाजी में उतारना जोखिम भरा था।
गैम्बीर की कोचिंग शैली पर सवाल
गौतम गैम्बीर, जो एक सफल अंतरराष्ट्रीय शिखर खिलाड़ी रहे हैं, को अब रणनीतिक निर्णयों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने सैंजू सैमसन के साथ बातचीत की, पर टीम चयन में पारदर्शिता की कमी ने खिलाड़ियों में असंतोष पैदा किया है। इसके अलावा, भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) के भीतर चयन पैनल की भूमिका और कोचिंग स्टाफ की सामंजस्यता को भी जांचा जा रहा है।
भविष्य की दिशा
टूर के बाद भारत को दो प्रमुख प्रश्नों का जवाब देना होगा: पहला, विदेशी पिचों में बॅटिंग क्रम को कैसे स्थिर किया जाए, और दूसरा, युवा प्रतिभाओं को दबाव‑पूर्ण परिस्थितियों में कैसे संभालें। यदि भारतीय टीम अपनी मौजूदा प्रणाली में सुधार नहीं करती, तो आगामी विश्व कप और एशियाई खेलों में प्रदर्शन में गिरावट का जोखिम बढ़ेगा।
समग्र रूप से, यह टूर भारतीय क्रिकेट के लिए एक चेतावनी संकेत है – कि ग्लोबल स्तर पर जीतने के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि सही रणनीति, चयन पारदर्शिता और मानसिक स्थिरता भी आवश्यक है।