इंग्लैंड ने टॉस जीतकर फील्डिंग चुनी, लेकिन भारतीय टीम ने शफाली वर्मा और यस्तिका भाटिया को जल्दी आउट कर 37/2 से उभरी। मधाना के 56* और जेमिमाह रोड्रिगेज के 35 ने भारत को 122/3 का मजबूत स्कोर दिलाया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मधाना ने 56* unbeaten बना कर भारत को 122/3 तक ले गए
- इंग्लैंड ने टॉस जीतकर फील्डिंग चुनी, पर पहले दो विकेट जल्दी गिरे
- रोड्रिगेज के 35 रन ने साझेदारी को मजबूत किया
लंदन के प्रसिद्ध लॉर्ड क्रिकेट ग्राउंड में 10 जुलाई, 2026 को महिलाओं की एकबारगी टेस्ट मैच का पहला सत्र शुरू हुआ। भारत और इंग्लैंड की इस ऐतिहासिक टक्कर में भारत ने पहले 37 रन पर दो विकेट खो दिए, लेकिन शफाली वर्मा और यस्तिका भाटिया को जल्दी आउट करने के बाद टीम ने तेज़ी से पुनरुत्थान किया।
मधाना की आक्रमणकारी पारी
ऑपनिंग बैट्समैन स्मृति मधाना ने 67 गेंदों पर 56* का तेज़ी से बना unbeaten स्कोर लगाया। उन्होंने पेसर लॉरेन फाइलर को दो लगातार चारों के साथ दबाव में रखा, फिर स्पिनर सोफी इकलस्टोन को छह के साथ मारते हुए मध्य-विकेट पर एक शानदार स्लोग‑स्वीप किया। इस पारी ने भारत की कुल रन‑रेट को 6 रन प्रति ओवर तक बढ़ा दिया, जिससे इंग्लैंड की गेंदबाजी को असहज महसूस हुआ।
रोड्रिगेज की साझेदारी और जोखिम
मधाना के साथ जेमिमाह रोड्रिगेज ने 38 गेंदों में 35 रन बनाकर टीम को 64 रन की तीसरी विकेट साझेदारी में जोड़ दिया। उन्होंने दो बार इकलस्टोन को रॉम्पर तक भेजा, जिससे भारत की स्कोरिंग रेट 6+ पर बनी रही। हालांकि, रोड्रिगेज ने तेज़ पेसर इसी वोंग की चौड़ी डिलीवरी को गलत समझ कर बॅट की एज से स्टम्प्स को हटाया, जिससे उनका वीक आउट हो गया।
हर्मनप्रीत का समर्थन और सत्र का अंत
मधाना और हर्मनप्रीत कौर ने क्रमशः 14 और 9* रन बनाए, जिससे भारत ने पहले सत्र को बिना और नुकसान के समाप्त किया। भारत ने अंत में 122/3 का स्कोर बनाकर लंच ब्रेक से पहले इंग्लैंड को दबाव में रखा। यह स्कोर महिलाओं के टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो भविष्य में अधिक लगातार टेस्ट खेलने की दिशा में कदम है।
इतिहास और आगे का मार्ग
भारत और इंग्लैंड के बीच महिला टेस्ट का इतिहास सीमित है, लेकिन दोनों टीमों ने हाल के वर्षों में टॉप‑टेयर क्रिकेट में अपनी जगह बनाई है। इस मैच से भारत को न केवल शुरुआती स्थितियों में धीरज दिखाने का अवसर मिला, बल्कि मधाना और रोड्रिगेज जैसे युवा स्टार्स को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने का मंच भी मिला। आगामी सत्र में इंग्लैंड को जवाबी रणनीति अपनानी होगी, जबकि भारत को अपनी बैटिंग गहराई और फील्डिंग की तीव्रता बनाए रखनी होगी।