लॉस एंजिल्स में खेले क्वार्टर‑फाइनल में स्पेन ने बेल्जियम को 2-1 से मात दी। सुपर सब मिकेल मेरिनो के 88वें मिनट के निर्णायक गोल ने टीम को फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में पहुंचा दिया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- स्पेन 2-1 से बेल्जियम को हराकर सेमीफाइनल में पहुँचा
- मिकेल मेरिनो ने 88वें मिनट में विजयी गोल किया
- स्पेन का अगला प्रतिद्वंद्वी फ्रांस, किलियन एमबाप्पे के नेतृत्व में
लॉस एंजिल्स के इकोनॉमिक्स स्टेडियम में 11 जुलाई 2026 को खेले क्वार्टर‑फाइनल में, स्पेन ने बेल्जियम को 2-1 से हराकर FIFA विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में जगह बनाई। मैच के अंतिम क्षणों तक तनाव बना रहा, पर 88वें मिनट में मिकेल मेरिनो ने बेल्जियम के गोलकीपर सेन्ने लैमेंस की गलती का फायदा उठाकर विजयी गोल दागा, जिससे स्पेन ने जीत सुनिश्चित की।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
स्पेन ने 2010 में अपनी पहली विश्व कप जीत हासिल की थी, लेकिन उसके बाद के टूर्नामेंटों में टीम ने कभी भी सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच पाई। इस जीत के साथ स्पेन 36 लगातार मैचों में हार से बचते हुए अपना अपराजेय रिकॉर्ड कायम रख रहा है। दूसरी ओर, बेल्जियम ने पिछले दो विश्व कपों में चौथी और पाँचवीं जगह हासिल की थी, लेकिन इस बार उनका सफर यहाँ समाप्त हुआ।
मैच विश्लेषण और प्रमुख खिलाड़ी
स्पेन ने पहले हाफ में पेड्रो पोरो के लो‑क्रॉस से फेबियन रुईज को गोल कर अग्रिम बढ़त ली। बेल्जियम ने देर से बराबरी का गोल किया, लेकिन मेरिनो का देर‑देर का गोल टीम को आगे ले गया। 18 वर्षीय लामिन यमाल ने विंग पर लगातार दबाव बनाया, कई बार बेल्जियम की रक्षा को चकित किया, परंतु गोल नहीं कर पाए। बेल्जियम के कप्तान थिबॉट कर्टोइस ने कई बार शानदार बचाव किया, लेकिन हाइड्रेशन ब्रेक के बाद बाएँ जांघ की चोट के कारण उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा।
सेमीफाइनल की संभावनाएँ
स्पेन को अब फ़्रांस का सामना करना है, जिसकी टीम किलियन एमबाप्पे के नेतृत्व में लगातार तीसरे विश्व कप फाइनल में पहुंचने की कोशिश कर रही है। दोनों टीमों के बीच टैक्टिकल टकराव, विशेषकर एमबाप्पे बनाम यमाल की व्यक्तिगत लड़ाई, इस मैच को टुर्नामेंट का हाइलाइट बना देगी। फ्रांस के कोच डिडिएर डेसचैम्प्स ने अपने आक्रमण में गति और फुर्ती पर जोर दिया है, जबकि लुइस डे ला फुएंते की स्पेनिश टीम ने संतुलित और धैर्यपूर्ण खेल दिखाया है।
भविष्य की झलक
यदि स्पेन फ्रांस को हराता है, तो वह 2026 में पहली बार फाइनल में पहुंचेगा, जिससे यूरोपीय दो दिग्गजों के बीच नया प्रतिद्वंद्विता स्थापित होगी। दूसरी ओर, फ्रांस के लिए यह अवसर है कि वह लगातार तीसरे विश्व कप फाइनल में जगह बना सके, जो उनके निरंतर शक्ति का प्रतीक होगा। इस मुकाबले के परिणाम से न केवल टुर्नामेंट का दिशा‑निर्देश बदल सकता है, बल्कि यूरोपीय फुटबॉल के भविष्य के संतुलन को भी प्रभावित करेगा।