एशियाई U23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 80.57 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण जीतने वाले आनंद सिंह ने अब 85 मीटर के लक्ष्य और ओलंपिक की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • आनंद सिंह ने चीन में आयोजित एशियाई U23 चैंपियनशिप में 80.57 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता।
  • वह भारत के प्रतिष्ठित '80 मीटर क्लब' में शामिल होने वाले उत्तर प्रदेश के छठे भाला फेंक खिलाड़ी बन गए हैं।
  • उनका अगला बड़ा लक्ष्य 85 मीटर का आंकड़ा पार करना और विश्व चैंपियनशिप एवं ओलंपिक में जगह बनाना है।
  • किशोर जेना उनके मार्गदर्शक और मेंटर के रूप में उनके साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं।

भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक स्वर्णिम क्षण में, उत्तर प्रदेश के उभरते हुए भाला फेंक खिलाड़ी आनंद सिंह ने चीन के ओरडोस में आयोजित एशियाई U23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपना दबदबा कायम किया है। 22 वर्षीय आनंद ने 80.57 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। यह जीत न केवल उनके व्यक्तिगत कौशल को दर्शाती है, बल्कि भारतीय भाला फेंक (Javelin Throw) के बढ़ते वर्चस्व का भी प्रमाण है।

एक उभरते सितारे का उदय

आनंद सिंह की यह सफलता महज एक संयोग नहीं है। जून में भुवनेश्वर में आयोजित नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चौथे स्थान पर रहने के बाद, उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और कड़ी मेहनत की। 80 मीटर की बाधा को पार करते हुए, वह भारत के उन चुनिंदा एथलीटों की सूची में शामिल हो गए हैं जो इस दूरी को पार कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के किशन देवपुर गांव से आने वाले आनंद अब प्रदेश के छठे ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने 80 मीटर का क्लब जॉइन किया है।

मेंटरशिप और प्रशिक्षण का प्रभाव

आनंद की सफलता के पीछे उनके परिवार का खेल के प्रति लगाव और सही मार्गदर्शन का बड़ा हाथ है। उनके दादा बृज बहादुर सिंह एक वॉलीबॉल खिलाड़ी थे और उनके चाचा भी भाला फेंक में सक्रिय थे। प्रशिक्षण के सफर में, उन्होंने जौनपुर में रुस्तम खान से शुरुआती ट्रेनिंग ली और बाद में रिलायंस स्पोर्ट्स फाउंडेशन के सहयोग से मुंबई में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया। विशेष रूप से, 2023 एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता किशोर जेना उनके मार्गदर्शक और मित्र के रूप में उनके साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो उनके तकनीकी कौशल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भविष्य की राह: 85 मीटर और ओलंपिक का सपना

स्वर्ण पदक जीतने के बाद आनंद का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि 80 मीटर का आंकड़ा तो बस शुरुआत है; उनका अगला सपना 85 मीटर के निशान को छूना है। कोच रुस्तम खान का मानना है कि यदि आनंद इसी तरह अपनी तकनीक और निरंतरता बनाए रखते हैं, तो वह जल्द ही सीनियर भारतीय टीम का हिस्सा बनेंगे और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करेंगे। उनका अंतिम लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप और आगामी ओलंपिक खेलों में तिरंगा लहराना है।