डिशैंप्स ने फ्रांस को 2018 विश्व कप जीत दिलाई, लेकिन हालिया टैक्टिकल चूक के कारण उनका राज़ समाप्त हो गया है। स्पेन के खिलाफ सेमीफ़ाइनल हार के बाद फ्रेंच मीडिया ने उनकी रणनीति को कठोर आलोचना का सामना कराया है, जबकि ज़िदान की संभावित नियुक्ति भविष्य को उजागर करती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • डेशैंप्स ने फ्रांस को 2018 विश्व कप जीत दिलवाई
  • टैक्टिकल लचीलापन की कमी से टीम पर सवाल उठे
  • जिदान के संभावित कोचिंग भविष्य को उजागर किया गया

स्पेन के खिलाफ विश्व कप सेमीफ़ाइनल में 2-0 की हार के बाद फ्रेंच मीडिया ने फ्रांस की आक्रमण क्षमता को ‘शक्ति‑हीन’ और ‘बैक‑अप योजना की कमी’ के रूप में बखान दिया। बाएँ बैक लुकास डिग्ने की पेनल्टी, कप्तान किलियन एम्बापे की ऑफ़साइड्स और डिशैंप्स की टैक्टिकल तैयारी पर लगातार सवाल उठे।

पिछला परिप्रेक्ष्य

डिशैंप्स के आगमन से पहले फ्रांस ने यूरो 2008 और विश्व कप 2010 में समूह चरण में ही बाहर हो कर राष्ट्रीय शर्म का सामना किया। रेमोंड डोमेनेक के तहत टीम में दरवाज़े पर बगावत और अराजकता थी, जिससे ‘लेस ब्लू’ को एक मज़ाक का रूप मिला था। लौरेंट ब्लांक ने यूरो 2012 में क्वार्टर‑फ़ाइनल तक पहुंच कर कुछ स्थिरता लाई, पर दीर्घकालिक दिशा की कमी स्पष्ट थी।

डिशैंप्स की सफलता

खिलाड़ी के रूप में अपने कर्ली करियर के बाद, डिशैंप्स ने टीम में सामंजस्य को प्राथमिकता दी और जटिल टैक्टिकल ब्रीफ़िंग से अधिक ‘खिलाड़ी को खेलने दो’ की नीति अपनाई। इस दृष्टिकोण ने 2014 विश्व कप में क्वार्टर‑फ़ाइनल, 2016 यूरो में घरेलू मैदान पर द्वितीय स्थान और 2018 रूस में विश्व कप जीत को जन्म दिया। उनका चार‑बैक संरचना, तेज़ काउंटर‑अटैक और डिफेंस‑फ़र्स्ट प्रैग्मा कई विरोधियों को चकित कर गया।

टैक्टिकल सीमाएँ और गिरावट

हालांकि, 2020 यूरो में स्विट्ज़रलैंड के खिलाफ राउंड‑ऑफ़‑१६ में पेनल्टी से बाहर होना, बैक‑फ़ाइव (पैवर्ड और राबियो) की असफल प्रयोग, और 2022 क़तर में अर्जेंटीना के सामने 2‑0 के शुरुआती नुकसान ने दिखाया कि ‘खिलाड़ी को खेलने दो’ की नीति कठिन टैक्टिकल प्रतिद्वंद्वियों के सामने विफल हो सकती है। 2024 यूरो में स्पेन के खिलाफ सेमीफ़ाइनल में मध्य‑मैदान में नियंत्रण की कमी फिर से उजागर हुई, जहाँ डिशैंप्स के पास कोई त्वरित समायोजन नहीं था।

भविष्य की राह

लेस ब्लू के भविष्य को लेकर अब ज़िदान का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जो यूरो 2028 में फ्रांस को जीत की ओर ले जाने की उम्मीद है। डिशैंप्स की विरासत दो‑धारी होगी: एक ओर स्थिरता और विश्व कप जीत की उपलब्धि, और दूसरी ओर टैक्टिकल अनुकूलन की कमी से उत्पन्न आलोचना। नई पीढ़ी के कोच इन सबक को अपनाकर फ्रांस को फिर से विश्व फुटबॉल की शीर्ष पर ले जाने की चुनौती का सामना करेंगे।