एशियाई खेलों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने एथलीटों को जापानी भोजन के साथ अनुकूलित करने की एक अनूठी पहल शुरू की है।

मुख्य बातें

  • एशियाई खेलों के लिए एथलीटों को जापानी स्वाद से परिचित कराया जा रहा है।
  • SAI बेंगलुरु केंद्र में सुशी, रामेन और उडोन जैसे व्यंजन परोसे जा रहे हैं।
  • इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खान-पान के कारण होने वाली समस्याओं को रोकना है।
  • यह कार्यक्रम एथलीटों की ऊर्जा और पाचन स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

आगामी Aichi-Nagoya एशियाई खेलों के लिए तैयारी तेज करते हुए, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक कदम उठाया है। बेंगलुरु स्थित SAI दक्षिणी केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे भारतीय एथलीटों को अब नियमित भारतीय भोजन के साथ-साथ पारंपरिक जापानी व्यंजन भी परोसे जा रहे हैं।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य एथलीटों को जापान की स्थानीय खाद्य संस्कृति के साथ पहले से ही सहज बनाना है। अक्सर देखा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भोजन में अचानक बदलाव के कारण एथलीटों का पाचन बिगड़ जाता है या उनकी ऊर्जा का स्तर गिर जाता है। इस बार, SAI ने सुशी (Sushi), रामेन (Ramen), उडोन नूडल्स (Udon Noodles) और शॉयू चिकन ब्रोथ (Shoyu Chicken Broth) जैसे व्यंजनों को अपने मेनू में शामिल किया है ताकि एथलीटों का शरीर इन स्वादों और सामग्रियों के लिए अनुकूलित हो सके।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि खेल विज्ञान में 'आहार अनुकूलन' (Dietary Acclimatisation) उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि शारीरिक प्रशिक्षण। टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 के दौरान, भारतीय खिलाड़ियों को स्थानीय भोजन के साथ तालमेल बिठाने में काफी संघर्ष करना पड़ा था। पेरिस पैरालंपिक के दौरान तो स्थिति इतनी गंभीर थी कि एथलीटों की कैलोरी संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए 1,800 ऊर्जा बार (energy bars) विदेश मंगवाने पड़े थे।

"हमारा प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जापान में भोजन के कारण हमारे एथलीटों को कोई कठिनाई न हो या अचानक आहार परिवर्तन से उनके प्रदर्शन पर कोई बुरा असर न पड़े।" - वी जेयराज, कार्यकारी शेफ, SAI NSSC

इस प्रक्रिया को चरणों में लागू किया गया है। सबसे पहले जापानी मिठाइयों और रोल्स के साथ शुरुआत की गई, जिसके बाद ऐपेटाइज़र और अब मुख्य भोजन में सुशी और साशिमी जैसे व्यंजन शामिल किए गए हैं। यह पूरी प्रक्रिया FSSAI फाइव-स्टार रेटेड सुविधा के तहत संचालित की जा रही है, जहाँ स्वच्छता और पोषण संबंधी 97 मानकों का कड़ाई से पालन किया जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

SAI ने इस तरह की आहार रणनीति का उपयोग पहले भी किया है, जैसे पिछले वर्ष जब भारतीय हॉकी टीम ने चिली का दौरा किया था। खेल मंत्रालय अब यह सुनिश्चित कर रहा है कि एथलीट केवल मैदान पर ही नहीं, बल्कि पोषण के स्तर पर भी विश्व स्तरीय तैयारी के साथ उतरें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. एथलीटों को जापानी भोजन क्यों दिया जा रहा है?
ताकि वे एशियाई खेलों के दौरान जापान के स्थानीय भोजन के साथ तालमेल बिठा सकें और पाचन या ऊर्जा से जुड़ी समस्याओं से बच सकें।

2. क्या यह भोजन सुरक्षित है?
हाँ, यह भोजन SAI की FSSAI फाइव-स्टार रेटेड सुविधा में अत्यंत उच्च स्वच्छता मानकों के साथ तैयार किया जा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: टोक्यो 2020 खेलों के दौरान, भारतीय एथलीटों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष रूप से ऊर्जा बार का आयात करना पड़ा था।