१७ साल की अनाहत सिंह ने विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतते हुए बताया कि राष्ट्रीयता खेल में कोई फर्क नहीं डालती। उसने मिस्र के प्रतिद्वंद्वी को अन्य खिलाड़ियों की तरह ही माना और भारत की टीम की द्वितीय लगातार ब्रॉंज़ जीत का जश्न मनाया।

मुख्य बिंदु

  • अनाहत सिंह पहली भारतीय बनीं जो विश्व जूनियर स्क्वैश खिताब जीतें।
  • उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयता प्रतिस्पर्धा को नहीं बदलती।
  • भारतीय जूनियर टीम ने लगातार दूसरा ब्रॉंज़ पदक जीता।

न्यू दिल्ली – १७ वर्षीय अनाहत सिंह ने ओंटारियो, कनाडा में आयोजित विश्व जूनियर स्क्वैश चैम्पियनशिप फाइनल में मिस्र की अमीना ऑरफ़ी को हराकर इतिहास लिखा। यह जीत भारत के लिए कई सालों बाद पहला विश्व जूनियर सिंगल्स खिताब था।

विजेता ने PTI को बताया, "मैं बचपन से ही मिस्रियों के साथ खेलती आई हूँ। राष्ट्रीयता मेरे खेल को नहीं बदलती, यह सिर्फ़ एक और प्रतिद्वंद्वी है।" यह बयान उन सुझावों के जवाब में आया कि मिस्रीय खिलाड़ियों को मानसिक लाभ मिलता है।

अनाहत ने पिछले चार वर्षों में कई बार करीब आने के बाद इस बार जीत हासिल करने पर अपने भाव व्यक्त किए। "पिछले चार सालों में मैं हमेशा करीब रही, लेकिन इस साल जीत पाकर बहुत खुशी है," उन्होंने कहा। उन्होंने भारतीय स्क्वैश की पूर्व नंबर‑वन जोशना चिनप्पा से प्रेरणा लेने का उल्लेख भी किया और आगे कहा कि अब वह सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं की ओर रुख करेगी।

भारत की लड़कों की टीम ने भी विश्व जूनियर स्क्वैश टीम चैम्पियनशिप में लगातार दूसरा ब्रॉँज़ पदक जीता, जिससे देश की युवा स्क्वैश शक्ति का विकास स्पष्ट हुआ। टीम के सदस्य अर्यवीर देवाण ने कहा, "यह जीत आसान नहीं थी, पर हम अगले साल और बेहतर करने की आशा रखते हैं।"

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारतीय स्क्वैश ने पिछले दो दशकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति की है। २०१० में जोशना चिनप्पा ने महिला वर्ग में कई विश्व स्तर के पदक जीते, जबकि पुरुष वर्ग में शरद शेट्टी और अभिषेक शर्मा ने निरंतर प्रदर्शन किया। अब अनाहत की जीत इस विकास का एक नया अध्याय जोड़ती है, जिससे भारत की भविष्य की एशियन और ओलंपिक संभावनाएँ और उज्ज्वल हो रही हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that Anahat’s triumph not only breaks a long‑standing barrier for Indian women in squash but also signals a shift in the sport’s competitive dynamics, encouraging more inclusive training programs across nations.

"अनाहत का विजयी दृष्टिकोण युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीयता से परे देखना सिखाता है, जो अंतर्राष्ट्रीय खेल में नई मानसिकता लाता है," कहा विशेषज्ञ कोच राजीव सिंह।
Did You Know?: भारत ने २००५ में पहली बार विश्व जूनियर स्क्वैश में महिला वर्ग में पदक जीता था, लेकिन २०२६ तक केवल एक ही विश्व खिताब हासिल किया था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अनाहत अगले कौन‑से सीनियर टूर्नामेंट में भाग लेंगी?
उत्तर: वह दो PSA इवेंट्स और एशियन गेम्स की तैयारी में हैं।

प्रश्न 2: भारतीय टीम ने लगातार ब्रॉँज़ क्यों जीता?
उत्तर: निरंतर प्रशिक्षण और अंतर्राष्ट्रीय अनुभव ने टीम को मजबूत बनाया है।