डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने पिनाका गाइडेड रॉकेट का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। इस परीक्षण में रॉकेट ने लक्ष्य पर textbook precision के साथ हिट किया, जिससे भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक को नई पहचान मिली।

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डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने अपने प्रमुख आर्टिलरी सिस्टम पिनाका के एक उन्नत संस्करण का परीक्षण किया, जिसमें एक गाइडेड रॉकेट को लक्ष्य पर लगभग 100 प्रतिशत सटीकता के साथ हिट किया गया। यह सफलता भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

पिनाका प्रणाली का परिचय

पिनाका, जो मूल रूप से एक मल्टी-रॉकेट लांचर सिस्टम है, को पहली बार 1990 के दशक में विकसित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य तेज़ी से बड़े पैमाने पर शत्रु के इन्फैंट्री और टैंक को नष्ट करना है। पिछले कुछ वर्षों में, DRDO ने इस प्रणाली को गाइडेड रॉकेट तकनीक के साथ उन्नत किया है, जिससे लक्ष्य पर सटीक हिट की संभावना बढ़ी है।

परीक्षण का विवरण

परीक्षण स्थल के रूप में राजस्थान के एक सुदूर सैन्य सीमा क्षेत्र को चुना गया। गाइडेड रॉकेट को 30 किमी दूर स्थित स्थिर लक्ष्य पर लॉन्च किया गया, और उन्नत नेविगेशन एवं टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम ने इसे लक्ष्य के केंद्र में ही ध्वस्त कर दिया। इस प्रक्रिया में रॉकेट की गति, पथ नियंत्रण, और टर्मिनल चरण की सटीकता को कई सेंसरों द्वारा रीयल‑टाइम में मॉनिटर किया गया।

रणनीतिक महत्व

इस परीक्षण से स्पष्ट होता है कि भारत अब लंबी दूरी की सटीकता वाले आर्टिलरी सिस्टम को आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जा रहा है। पिनाका गाइडेड रॉकेट न केवल सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि संभावित युद्ध परिदृश्यों में तेज़ प्रतिक्रिया क्षमता भी प्रदान करेगा। यह भारत के रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि और स्वदेशी तकनीक पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

भविष्य की राह

DRDO ने कहा है कि इस सिस्टम को अगले दो वर्षों में भारतीय सेना के विभिन्न फील्ड यूनिट्स में तैनात किया जाएगा। साथ ही, निर्यात संभावनाओं को देखते हुए, पिनाका गाइडेड रॉकेट को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पेश करने की योजना है, जिससे भारत की रक्षा निर्यात क्षमता में नई ऊँचाइयाँ हासिल होंगी।