दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इंडरलोक‑इंद्रप्रस्थ 12.3 किमी मेट्रो कॉरिडोर के काम का आगाज़ किया। यह मैजेंटा लाइन को 89 किमी तक विस्तारित करेगा, जिससे राजधानी में कनेक्टिविटी और पर्यावरण‑मित्रता में बड़ा सुधार होगा।
नई दिल्ली – 10 जुलाई, 2026 को राजधानी के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 12.3 किमी लंबी इंडरलोक‑इंद्रप्रस्थ मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण औपचारिक रूप से शुरू किया। यह परियोजना दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के मैजेंटा लाइन (लाइन‑8) का एक पूर्णतः भूमिगत विस्तार है, जिसमें दस नए स्टेशन शामिल होंगे।
परियोजना की रूपरेखा
इंडरलोक‑इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर में निम्नलिखित स्टेशन होंगे: इंडरलोक, दया बस्ती, सराय रोहिला, अजमल खान पार्क, झांडेवाल मंदिर, नबी करीम, न्यू दिल्ली, दिल्ली गेट, दिल्ली सचिवालय‑आईजी स्टेडियम और इंद्रप्रस्थ। सराय रोहिला स्टेशन पर डायाफ्राम वॉल का निर्माण अब शुरू हो चुका है, जो इस प्रोजेक्ट के प्रथम चरण को चिन्हित करता है।
इंटेग्रेशन और कनेक्टिविटी
नए लाइन में इंडरलोक पर रेड और ग्रीन लाइनों, नबी करीम पर मैजेंटा लाइन, न्यू दिल्ली पर येलो और एयरपोर्ट एक्सप्रेस (ऑरेंज) लाइन, दिल्ली गेट पर वायलेट लाइन और इंद्रप्रस्थ पर ब्लू लाइन के साथ इंटरचेंज की सुविधा होगी। इससे आईटीओ, इंद्रप्रस्थ, नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजमार्ग और कई सरकारी संस्थानों तक सीधा, तेज़ और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन संभव होगा।
ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व
कॉरिडोर को मार्च 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दी थी और उसी महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया। पूर्णता के बाद मैजेंटा लाइन लगभग 89 किमी की होगी, जो DMRC के नेटवर्क में सबसे लंबी लाइन बन जाएगी। इस विस्तार से कार‑परिवहन में कमी, वायु प्रदूषण में घटाव और ऊर्जा‑संचयन में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे दिल्ली को एक सच्ची हरित राजधानी बनाने की दिशा में कदम बढ़ेगा।
भविष्य की योजना और चुनौतियाँ
यह परियोजना DMRC के फेज‑IV के तीन गैर‑प्राथमिक कॉरिडरों में से एक है। लजपत नगर‑साकेत जी‑ब्लॉक कॉरिडर का काम पिछले महीने शुरू हुआ, जबकि ऋथला‑कुंदली कॉरिडर अभी तक शुरू नहीं हुआ है। निर्माण के दौरान भू‑तकनीकी जटिलताएँ, भूमि‑स्वीकार प्रक्रिया और समय‑सीमा का प्रबंधन प्रमुख चुनौतियों के रूप में सामने आएँगे।
निष्कर्ष
राज्य और केंद्रीय सरकार दोनों की सहयोगी पहल से यह मेट्रो विस्तार दिल्ली के सार्वजनिक‑परिवहन परिदृश्य को पुनः आकार देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर पूरा हो गया तो यह परियोजना न केवल यात्रियों के समय‑संकट को हल करेगी, बल्कि शहर की सतत‑विकास योजना में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।