मेटा ने अल्बर्टा, कनाडा में एक विशाल AI डेटा सेंटर के निर्माण की घोषणा की, जिसका अनुमानित निवेश 13 बिलियन कैनेडियन डॉलर (≈ 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर) है। यह सुविधा 800,000 घरों के बराबर बिजली खपत करेगी, लेकिन कंपनी ने जल संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा के जरिए पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने का वादा किया है।
मेटा ने अपने AI इन्फ्रास्ट्रक्चर को तेज़ी से बढ़ाने के लिए अल्बर्टा, कनाडा में एक नया डेटा सेंटर बनाने का निर्णय लिया है, जिसका अनुमानित लागत 13 बिलियन कैनेडियन डॉलर (लगभग 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर) है। यह परियोजना कंपनी का पहला डेटा सेंटर कनाडा में और विश्वभर में 33वाँ केंद्र है। यह सुविधा स्टर्जन काउंटी में स्थित होगी और प्रारंभिक क्षमता 1 गिगावाट, जिसे भविष्य में 1.8 गिगावाट तक बढ़ाया जा सकता है।
पृष्ठभूमि और रणनीति
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बढ़ती मांग ने बड़े डेटा सेंटरों के लिए ऊर्जा और जल संसाधनों पर नई चुनौतियाँ पैदा की हैं। मेटा ने इस परियोजना के माध्यम से AI मॉडल के प्रशिक्षण और संचालन के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग शक्ति को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। अल्बर्टा का चयन प्राकृतिक गैस की प्रचुरता, कम ऊर्जा लागत और ठंडे जलवायु के कारण हुआ है, जो सर्वर फॉर्म के कूलिंग खर्च को घटाता है।
ऊर्जा और जल उपयोग
केंद्र को लगभग 800,000 घरों की बिजली खपत के बराबर ऊर्जा की आवश्यकता होगी। मेटा ने पेम्बिना पाइपलाइन के साथ मिलकर एक प्राकृतिक गैस चालित पावर प्लांट बनाने का वादा किया है, जो अगले दशक में कार्यान्वित होगा। इस बीच, कैपिटल पावर 250 मेगावाट की बिजली आपूर्ति करेगा। जल उपयोग को कम करने के लिए, मेटा ने बंद-लूप तरल कूलिंग सिस्टम अपनाया है, जिससे कुल जल खपत एक सामान्य गोल्फ कोर्स से भी कम रहेगी।
पर्यावरणीय चिंताएँ और प्रतिक्रिया
पर्यावरणीय समूहों ने इस परियोजना पर जल और ऊर्जा संसाधनों पर संभावित दबाव के कारण आलोचना की है। ग्रीनपीस के कीन स्टुअर्ट ने 'मेटा और अन्य टेक दिग्गजों को AI के लिए पर्यावरणीय और मानवाधिकार संरक्षण हेतु एक मौराटोरियम की आवश्यकता है' का आग्रह किया। इस बीच, अमेज़न जैसी कंपनियाँ भी अपने डेटा सेंटरों में जल उपयोग को कम करने के प्रयास कर रही हैं।
भविष्य के लिए निहितार्थ
मेटा का यह कदम AI के ऊर्जा-गहन भविष्य का प्रतीक है। यदि यह परियोजना सफलतापूर्वक चलती है, तो यह अन्य टेक कंपनियों को समान बड़े पैमाने के केंद्र बनाने के लिए प्रेरित कर सकती है। साथ ही, ऊर्जा और जल संरक्षण की नीतियों का सख्त पालन आवश्यक हो जाएगा।