सिलिकॉन बिच प्रोग्राम के होमकमिंग इनीशिएटिव के तहत 630 वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ, जिनमें से 300 के पास 15 साल से अधिक का अनुभव है, मंग्लुरु‑उडुपी क्षेत्र में पुनः काम करने का इरादा रख रहे हैं। यह कदम कोस्टल कर्नाटक को भारत के प्रमुख टेक‑इनोवेशन हब में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 630 वरिष्ठ तकनीकी पेशेवर मंग्लुरु‑उडुपी क्षेत्र में वापसी चाहते हैं।
  • 300 से अधिक विशेषज्ञों के पास 15+ साल का उद्योग अनुभव है।
  • सिलिकॉन बिच प्रोग्राम क्षेत्र को टेक‑इनोवेशन हब बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

सिलिकॉन बिच डायलॉग सीरीज़ के मंच पर यूनिकॉर्ट के सह-संस्थापक एवं CTO प्रशांत शेनॉय ने बताया कि 630 तकनीकी पेशेवर, जो वर्तमान में कोस्टल कर्नाटक के बाहर कार्यरत हैं, होमकमिंग पहल के माध्यम से अपने मूल प्रदेश में लौटने के इच्छुक हैं। इनमें से 300 से अधिक के पास 15 साल से अधिक का व्यावसायिक अनुभव है, जिससे इस पहल का संभावित प्रभाव अत्यधिक उल्लेखनीय है।

पृष्ठभूमि और लक्ष्य

सिलिकॉन बिच प्रोग्राम (SBP) का मुख्य उद्देश्य कोस्टल कर्नाटक को एक प्रमुख तकनीकी एवं नवाचार केंद्र में परिवर्तित करना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, SBP अनुभवी पेशेवरों को आकर्षित करने, उन्हें स्थानीय कंपनियों के साथ जोड़ने और एक स्थायी इनोवेशन लेयर तैयार करने पर ध्यान दे रहा है। शेनॉय ने कहा, “जब तक हम अकादमी और उद्योग को एक साथ नहीं लाते, इस इनोवेशन लेयर का निर्माण संभव नहीं होगा।”

स्थानीय तकनीकी इकोसिस्टम का वर्तमान स्वरूप

कर्नाटक डिजिटल इकोनॉमी मिशन (KDEM) के सीईओ संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में कोस्टल कर्नाटक में 300 से अधिक तकनीकी कंपनियां और 35,000 पेशेवर कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 22,000 लोग घर से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस क्लस्टर में प्रतिभा की प्रचुरता है, परंतु इसे प्रभावी रूप से उपयोग करने के लिए एक समन्वित नवाचार ढांचा आवश्यक है।

एमएल‑रेडी सिटी के रूप में मंग्लुरु

NTT DATA के एक्जीक्यूटिव मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक सत्य ने मंग्लुरु को “AI‑ready city” कहा। उन्होंने बताया कि 2025 में कंपनी ने उडुपी‑आधारित क्लाउड इंजीनियरिंग फर्म नाइवियस सॉल्यूशन्स का अधिग्रहण किया, मुख्य कारण था इस क्षेत्र में उपलब्ध उच्चस्तरीय टैलेंट पूल। “भर्ती में समस्या नहीं, बल्कि टैलेंट को बनाए रखने में चुनौती है—और यहाँ रिटेंशन दर अत्यंत संतोषजनक है,” उन्होंने कहा।

भविष्य की संभावनाएं

यदि इस तरह के पहल लगातार जारी रहे, तो कोस्टल कर्नाटक न केवल भारत के प्रमुख टेक हब में बदल सकता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निवेशकों को आकर्षित कर सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस प्रवाह से स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था में स्थायी वृद्धि होगी।