पिनाका मल्टी‑रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ने इज़राइल के उन्नत रॉकेट तकनीक को अपनाकर लागत घटाई, रेंज दुगुनी की और मार्ग में दिशा बदलने की क्षमता जोड़ दी है। यह विकास भारतीय रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता और रणनीतिक शक्ति को नई दिशा देता है।
भारतीय सेना द्वारा उपयोग किया जाने वाला पिनाका मल्टी‑रॉकेट लॉन्चर (MRLS) अब इज़राइल के नवीनतम रॉकेट तकनीक को अपनाकर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा हो गया है। पिछले कुछ महीनों में रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि पिनाका का अगला संस्करण लागत‑प्रभावी, रेंज में दो गुना और मार्ग में दिशा‑परिवर्तन (mid‑course steering) की क्षमता रखेगा। यह बदलाव न केवल मौजूदा हथियार प्रणाली को आधुनिकीकरण करेगा, बल्कि भारत की रणनीतिक क्षमताओं को भी बढ़ाएगा।
पिनाका का विकास और मौजूदा क्षमताएँ
पहले संस्करण के पिनाका को 1990 के दशक में विकसित किया गया था, जिसकी अधिकतम रेंज लगभग 40 किलोमीटर थी और यह एक साथ 12 रॉकेट लॉन्च कर सकता था। इस प्रणाली ने भारत‑पाकिस्तान और भारत‑चीन सीमाओं पर कई बार सफल प्रयोग दिखाए हैं, लेकिन इसकी सीमित रेंज और दिशा‑परिवर्तन की कमी ने निरंतर सुधार की मांग को जन्म दिया।
इज़राइल की रॉकेट तकनीक से प्रेरणा
इज़राइल ने पिछले दशकों में अपने हवाई रक्षा और टैक्टिकल रॉकेट में अत्याधुनिक गाइडेंस और थ्रस्ट‑वेक्टरिंग तकनीक विकसित की है। विशेष रूप से डायनामिक जेट कंट्रोल (DJC) और इन्फ्रारेड टर्मल इमेजिंग ने रॉकेट को उड़ान के दौरान लक्ष्य की दिशा बदलने की अनुमति दी है। भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों ने इन तकनीकों को पिनाका के नए प्रोटोटाइप में समाहित करने के लिए एक विशेष संयुक्त अनुसंधान समूह बनाया।
नए पिनाका की प्रमुख विशेषताएँ
1. **लागत में 30% कमी** – स्थानीय सामग्री और सॉलिड‑प्रोपैल्शन तकनीक के उपयोग से उत्पादन लागत घटाई गई।
2. **रेंज में दो गुना वृद्धि** – अधिकतम 80 किलोमीटर तक की दूरी को कवर करने में सक्षम, जिससे गहरा क्षेत्र कवरेज मिलेगा।
3. **मार्ग में दिशा‑परिवर्तन** – इज़राइल‑प्रेरित थ्रस्ट‑वेक्टरिंग प्रणाली से रॉकेट उड़ान के दौरान लक्ष्य को पुनः लक्ष्यित कर सकता है, जिससे दुश्मन की बचाव रणनीति विफल हो सकती है।
4. **डिजिटल इंटीग्रेशन** – आधुनिक युद्धक्षेत्र में नेटवर्क‑सेंटरड कमांड सिस्टम के साथ सहजता से जुड़ता है।
रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव
इन सुधारों से भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। कम लागत और उच्च रेंज का संयोजन निर्यात बाजार में भी प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देगा, खासकर उन देशों के लिए जो किफायती लेकिन प्रभावी एंटी‑एयरक्राफ्ट सिस्टम की तलाश में हैं। साथ ही, मध्य‑कोर्स स्टियरिंग की नई क्षमता पिनाका को जमीनी, समुद्री और हवाई दोनों प्रकार के खतरों के खिलाफ बहु‑स्तरीय रक्षा में सक्षम बनाएगी।
आगे का रास्ता
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 2025 तक नई पिनाका प्रणाली का पूर्ण पैमाने पर उत्पादन शुरू हो जाएगा, और अगले दो वर्षों में इसे भारतीय सेना के प्रमुख क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। इस बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सहयोग के मॉडल को और भी विस्तारित किया जा सकता है, जिससे भारत‑इज़राइल रक्षा साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाया जा सके।