भारतीय सेना ने 450 कार्ल गस्टाफ Mk IV मल्टी‑रोल रॉकेट लॉन्चर के लिए भारतीय निर्माताओं से प्रस्ताव आमंत्रित किया। यह कदम सेना की इन्फैंट्री आधुनिकीकरण योजना और मेक इन इंडिया पहल को गति देगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 450 स्वदेशी कार्ल गस्टाफ Mk IV लॉन्चर की खरीद के लिए RFP जारी
  • उत्पादन जयपुर के झज्जर में Saab की नई फैक्ट्री में होगा
  • आधुनिक सेंसिंग, लंबी बैरल लाइफ और विभिन्न 84 mm गोलाबारी के साथ बहु‑भूमिका क्षमताएँ

भारतीय सेना ने अपने इन्फैंट्री आधुनिकीकरण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में 450 स्वदेशी कार्ल गस्टाफ Mk IV मल्टी‑रोल रॉकेट लॉन्चर खरीदने के लिए Buy (Indian) श्रेणी के तहत एक अनुरोध‑प्रस्ताव (RFP) जारी किया है। यह प्रस्ताव न केवल शहरी और पहाड़ी क्षेत्रों में सैनिकों की गतिशीलता बढ़ाएगा, बल्कि पुराने शोल्डर‑फ़ायर हथियारों की जगह हल्के और बहु‑उपयोगी सिस्टम को भी स्थापित करेगा।

पृष्ठभूमि और तकनीकी विवरण

Saab का 84 mm कार्ल गस्टाफ Mk IV विश्व भर में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला रीकॉयलेस हथियार है। लगभग 6.6‑7 किलोग्राम वजन (साइट और सहायक उपकरणों के बिना) इसे पूर्ववर्ती मॉडलों से काफी हल्का बनाता है, जिससे पादरी सैनिकों के लिए चलाने में आसानी होती है। Mk IV को विशेष रूप से बहु‑भूमिका के लिए डिज़ाइन किया गया है—यह न केवल टैंक‑ध्वंसक गोलाबारी, बल्कि बंकर, इमारत, दुश्मन की फायर‑पॉइंट और यहाँ तक कि धुंध एवं प्रकाश राउंड भी चला सकता है।

स्पेसिफिकेशन और संचालन क्षमता

RFP में नए लॉन्चरों को मौजूदा कार्ल गस्टाफ Mk III की सटीकता और विश्वसनीयता से समान या अधिक प्रदर्शन देना अनिवार्य किया गया है। न्यूनतम बैरल लाइफ 1,500 शॉट या 15 वर्ष निर्धारित किया गया है, तथा -20 °C से +50 °C तक के तापमान, धूल‑भरी या आर्द्र परिस्थितियों में भी भरोसेमंद काम करने की शर्तें रखी गई हैं। डिजिटल फायर‑कंट्रोल, रेड‑डॉट साइट और पिकैटनी रेल जैसी आधुनिक सेंसिंग प्रणाली के साथ संगतता, शॉट काउंटर और एर्गोनोमिक शोल्डर सपोर्ट जैसे उन्नत फीचर भी अनिवार्य हैं।

निर्माण एवं मेक‑इन‑इंडिया पहल

Saab की नई सुविधा, जो हरियाणा के झज्जर में स्थापित होगी, इस सिस्टम की पहली विदेशी उत्पादन साइट होगी। इस प्लांट में पूर्ण लॉन्चर और मुख्य घटकों का निर्माण होगा, जिससे भारत में उन्नत रक्षा उपकरणों की स्वदेशी उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय उत्पादन से स्पेयर पार्ट्स, रख‑रखाव और ammunition की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे भारतीय सेना की लॉजिस्टिक चेन में स्थिरता आएगी।

भविष्य की संभावनाएँ

यह खरीद न केवल इन्फैंट्री की फायरपावर को बढ़ाएगी, बल्कि भारत की रक्षा उद्योग में स्व-निर्माण की आत्मविश्वास को भी सुदृढ़ करेगी। जैसा कि भारत ने पहले ही विविध क्षमताओं वाले मिसाइल और विमान प्रणालियों को घरेलू स्तर पर विकसित किया है, कार्ल गस्टाफ Mk IV का उत्पादन इस प्रवृत्ति को जारी रखेगा और भविष्य में संभावित निर्यात अवसरों के द्वार भी खोलेगा।