आंध्र प्रदेश ने 800 शहरी जल आपूर्ति और सीवेज परियोजनाओं की वास्तविक‑समय निगरानी के लिये ऑनलाइन वर्क्स मॉनिटरिंग सिस्टम (OWMS) शुरू किया। यह मंच भू‑स्थान टैग्ड फोटो, मोबाइल ऐप और डैशबोर्ड के माध्यम से बॉटलनेक की पहचान और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई को सक्षम करेगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 800 शहरी जल परियोजनाओं की वास्तविक‑समय निगरानी
- भू‑स्थान टैग्ड फ़ोटो और मोबाइल ऐप से डेटा अपलोड
- बॉटलनेक पहचान, जिम्मेदारी आवंटन और तेज़ प्रशासनिक कार्रवाई
आंध्र प्रदेश ने ऑनलाइन वर्क्स मॉनिटरिंग सिस्टम (OWMS) के तहत 123 शहरी स्थानीय निकायों में चल रही 800 से अधिक जल आपूर्ति एवं सीवेज परियोजनाओं को डिजिटल रूप से ट्रैक करने का कदम उठाया है। इस पहल से राज्य सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है।
डिजिटल डैशबोर्ड और मोबाइल एप्लिकेशन
इंजीनियर्स फील्ड से भू‑स्थान टैग्ड तस्वीरें और प्रगति अपडेट मोबाइल एप के ज़रिए अपलोड करेंगे, जबकि पर्यवेक्षक अधिकारी प्रत्येक प्रविष्टि को सत्यापित करेंगे। एकीकृत डैशबोर्ड में जल स्रोत, उपचार संयंत्र, पाइपलाइन, जलाशय, घरेलू कनेक्शन और सीवेज उपचार के सभी चरणों को लाइव देखा जा सकेगा। यह प्रणाली न केवल डेटा की सटीकता सुनिश्चित करती है, बल्कि बॉटलनेक की पहचान को मिनटों में संभव बनाती है।
पृष्ठभूमि और जल अभाव की गंभीरता
आंध्र प्रदेश में शहरी जनसंख्या लगभग 1.735 करोड़ है, जो 2029 तक 1.909 करोड़ तक बढ़ने का अनुमान है। दैनिक जल आवश्यकता लगभग 2,860 मिलियन लीटर है, जबकि वर्तमान आपूर्ति केवल 2,098 मिलियन लीटर है, जिससे 762 मिलियन लीटर की कमी रह गई है। साथ ही, सीवेज उपचार क्षमता 711 मिलियन लीटर है, जबकि अपशिष्ट जल उत्पादन 2,147 मिलियन लीटर है। इन असंतुलनों को पाटने के लिये राज्य ने AMRUT 2.0, AIIB‑सहायता प्राप्त परियोजनाओं, यूर्बन चैलेंज फंड, UIDF और स्वच्छ भारत मिशन 2.0 सहित छह प्रमुख कार्यक्रमों में लगभग ₹19,561 करोड़ निवेश किए हैं।
प्रशासनिक सुधार और आर्थिक प्रभाव
OWMS के माध्यम से बिलिंग प्रक्रिया को ऑनलाइन लाया गया है, जिससे भुगतान का औसत समय 20‑25 दिन से घटकर लगभग एक सप्ताह हो गया है। साथ ही, भूमि विवाद, नियामक मंजूरी और उपयोगिता स्थानांतरण जैसी बाधाओं को डैशबोर्ड पर ट्रैक किया जाएगा, जिससे परियोजनाओं की पूर्णता गति में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। यह डिजिटल परिवर्तन न केवल जल सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि निवेश के हर रुपये को मापनीय परिणाम में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भविष्य की दृष्टि
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाया गया, तो भारत में शहरी जल संकट का समाधान तेज़ और कुशल हो सकता है। डिजिटल निगरानी, डेटा‑आधारित निर्णय‑लेने और सार्वजनिक भागीदारी को मिलाकर, आंध्र प्रदेश ने बुनियादी ढाँचा प्रबंधन में नई मानक स्थापित की है।