केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि मुंबई‑अहमदाबाद हाई‑स्पीड रेल का पहला चरण, सूरत‑बिलीमोरा सेक्शन, अगले वर्ष से चालू होगा। इस परियोजना से राष्ट्रीय जुड़ाव, आर्थिक एकीकरण और नई हाई‑स्पीड रेल कॉरिडोर का विकास तेज़ होगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सूरत‑बिलीमोरा सेक्शन 2025 में संचालन शुरू करेगा।
- पूरा मुंबई‑अहमदाबाद कॉरिडोर 2027 तक चरणबद्ध रूप से चालू होगा।
- हाई‑स्पीड रेल नेटवर्क में नई कनेक्शन, जैसे पुणे‑हैदराबाद, चेन्नई‑हैदराबाद, और बेंगलुरु‑हैदराबाद, जो आर्थिक गतिशीलता को बढ़ाएंगे।
मुंबई‑अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का पहला परिचालन खंड, सूरत‑बिलीमोरा, गुजरात में अगले वर्ष से सेवा में आएगा, यह घोषणा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हैदराबाद में हुए HYSEA GCCS & IT राउंडटेबल के दौरान की। यह खंड 113 किमी लंबा है और 320 किमी/घंटा की गति से चलने वाले रेज़र‑शार्प ट्रेनों को चलाने के लिए तैयार किया जा रहा है।
परियोजना की पृष्ठभूमि
भारत ने 2017 में जापान के सहयोग से अपने पहले हाई‑स्पीड रेल प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी थी। जापान की शिंकानसेन तकनीक को अपनाते हुए, इस रूट की कुल लंबाई 508 किमी है, जो मुंबई‑अहमदाबाद के बीच के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ता है। निर्माण कार्य 2020 में शुरू हुआ, लेकिन भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और तकनीकी चुनौतियों के कारण कई बार देरी हुई। फिर भी, पिछले दो वर्षों में गति से प्रगति ने इस देरी को काफी हद तक कम कर दिया है।
चरणबद्ध संचालन योजना
सूरत‑बिलीमोरा के बाद अगले चरण में वापी‑सूरत, फिर वापी‑अहमदाबाद, अहमदाबाद‑थाणे और अंततः अहमदाबाद‑मुंबई रूट को क्रमशः 2026‑2027 में लॉन्च किया जाएगा। इस क्रमबद्ध दृष्टिकोण का उद्देश्य पहले छोटे खंडों में संचालन शुरू करके तकनीकी एवं संचालन संबंधी समस्याओं को हल करना और यात्रियों को शीघ्र लाभ पहुंचाना है।
व्यापक आर्थिक प्रभाव
हाई‑स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार से न केवल यात्रा समय में भारी कमी आएगी, बल्कि गुजरात‑महाराष्ट्र के औद्योगिक क्लस्टर को भी एकीकृत किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, मुंबई‑पुणे 170 किमी की दूरी को 48 मिनट में तय किया जा सकेगा, जबकि पुणे‑हैदराबाद 500 किमी की यात्रा दो घंटे आठ मिनट में पूरी होगी। इससे व्यापार, पर्यटन और श्रम बाजार में नई संभावनाएँ उत्पन्न होंगी।
हैदराबाद को हाई‑स्पीड हब बनाना
वर्तमान में केंद्र सरकार ने हैदराबाद को तीन नई हाई‑स्पीड रेल कॉरिडोर—पुणे‑हैदराबाद, चेन्नई‑हैदराबाद और बेंगलुरु‑हैदराबाद—से जोड़ने की योजना बनाई है। यह शहर को दक्षिण भारत का प्रमुख लॉजिस्टिक और तकनीकी हब बनाने में मदद करेगा, जिससे दक्षिणी राज्यों के बीच आर्थिक एकीकरण को नई गति मिलेगी।
इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार और भविष्य की दृष्टि
रेलवे मंत्रालय ने 'नव‑निर्माण' कार्यक्रम के तहत 261 स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया है, जिसमें सिकंदराबाद स्टेशन का पुनर्निर्माण भी शामिल है। साथ ही, टेलंगाना को 5,400 करोड़ रुपये का रेल बजट आवंटित किया गया है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। इस व्यापक सुधार से भारत को विश्व स्तर पर हाई‑स्पीड रेल तकनीक में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मिला है।