तीरुची के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) का आधुनिकीकरण कार्य 87 लाख रुपये की लागत से चल रहा है। नई स्मार्ट क्यू/विज़िटर मैनेजमेंट प्रणाली, एयर‑कंडीशनिंग और उन्नत ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक इसे सेवा‑प्रदान में क्रांतिकारी बनायेंगे।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ₹87 लाख की निवेश से RTO को स्मार्ट क्यू प्रणाली और एसी वाले काउंटर मिलेंगे।
  • ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक को विस्तृत कर मानक परीक्षण को सुधारा जाएगा।
  • नए QR‑कोड प्रवेश प्रणाली से उम्मीदवारों का इंतज़ार समय घटेगा।

तीरुची पश्चिम RTO, पिरट्टियूर में स्थित, एक व्यापक नवीनीकरण परियोजना के तहत जल्द ही एक "स्मार्ट ऑफिस" बन जाएगा। यह परियोजना राज्य के कुछ अन्य प्रदेशों, विशेषकर गुजरात में लागू की गई समान प्रणालियों की सफलता को देखते हुए तैयार की गई है। कुल लागत लगभग ₹87 लाख निर्धारित की गई है, जिसमें पूर्ण एयर‑कंडीशनिंग, आधुनिक काउंटर और प्रतीक्षालय, तथा विज़िटर मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर शामिल है।

स्मार्ट क्यू और QR‑कोड प्रणाली

परिवहन विभाग के अनुसार, नए सिस्टम में आवेदक सेवा शुल्क का भुगतान करने के बाद एक QR कोड प्राप्त करेंगे। इस कोड को स्कैन करके ही कार्यालय में प्रवेश संभव होगा, जिससे अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित किया जा सकेगा। प्रवेश के बाद, डिजिटल संकेतकों के माध्यम से आवेदकों को उचित काउंटर की ओर निर्देशित किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया चरण‑बद्ध और पारदर्शी बनती है।

ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक का आधुनिकीकरण

एक महत्वपूर्ण घटक है ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ADTT)। इसे मूल रूप से जून 8 को मारुति सुजुकी इंडिया के सहयोग से शुरू किया गया था, लेकिन शुरुआती दौर में ट्रैक की संकीर्णता के कारण पास‑रेट में गिरावट देखी गई। अब ट्रैक को विस्तार देते हुए, हाई‑डेफिनिशन कैमरे, RFID सेंसर, रीयल‑टाइम एनालिटिक्स और एकीकृत आईटी सिस्टम से लैस किया जा रहा है। यह तकनीकी उन्नयन मानव हस्तक्षेप को न्यूनतम कर, परीक्षण को अधिक निष्पक्ष और मानक‑आधारित बनाता है।

स्थानीय प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा

ड्राइविंग स्कूलों के प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्तमान ट्रैक छोटे कारों के लिए अनुकूल है, जबकि बड़े व्हीकल बेस वाले वाहनों के लिए कठिनाई पैदा करता है। इस कारण, ट्रैक की चौड़ाई बढ़ाने और परीक्षण अवधि को लम्बा करने की मांग की जा रही है। सरकार की नई योजना इन सुझावों को ध्यान में रखकर ट्रैक को पुनः डिजाइन करेगी, जिससे सभी वर्ग के अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके।

स्मार्ट ऑफिस के रूपांतरण से तिरुची पश्चिम RTO न केवल सेवा गति में सुधार करेगा, बल्कि डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक मॉडल के रूप में भी स्थापित होगा। यह पहल अन्य राज्य‑स्तरीय RTOs के लिए एक बेंचमार्क बन सकती है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर परिवहन सेवाओं में व्यापक परिवर्तन संभव हो सकेगा।