एआई (AI) के दौर में डीपफेक वीडियो और फोटो एक गंभीर समस्या बन गए हैं। जानें भारतीय कानूनों और साइबर सुरक्षा के उपायों के बारे में जो आपकी पहचान को सुरक्षित रख सकते हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • डीपफेक एआई तकनीक का उपयोग करके किसी के चेहरे या शरीर को दूसरे के साथ बदल देता है।
  • आईटी नियम 2021 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को शिकायत मिलने के 24 घंटों के भीतर आपत्तिजनक सामग्री हटानी होगी।
  • आईटी अधिनियम की धारा 66E, 67, 67A और 67B के तहत गोपनीयता भंग करने और अश्लील सामग्री फैलाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
  • पीड़ित व्यक्ति राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

आज के डिजिटल युग में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने जहां दुनिया को बदलने की क्षमता दी है, वहीं इसने 'डीपफेक' जैसे खतरनाक हथियार भी पेश किए हैं। डीपफेक का अर्थ है एआई का उपयोग करके किसी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज या वीडियो को इतनी सटीकता से बदलना कि असली और नकली में फर्क करना लगभग नामुमकिन हो जाए। अभिनेत्री रश्मिका मंदाना जैसे मशहूर चेहरों के साथ हुए हालिया मामलों ने इस तकनीक के दुरुपयोग और इसके मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

डीपफेक क्या है और यह कैसे काम करता है?

डीपफेक तकनीक 'जनरेटिव एआई' (Generative AI) पर आधारित है। इसके माध्यम से अपराधी किसी व्यक्ति की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों या निजी डेटा का उपयोग करके फर्जी वीडियो, अश्लील सामग्री या भ्रामक ऑडियो क्लिप बना सकते हैं। यह न केवल मशहूर हस्तियों के लिए, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी एक बड़ा खतरा है, जिसका उपयोग ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी और प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए किया जा सकता है।

कानूनी सुरक्षा और आपके अधिकार

यदि आप या आपका कोई परिचित डीपफेक का शिकार होता है, तो घबराने के बजाय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। भारत में आईटी नियम 2021 (IT Rules 2021) के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे X, Meta, Google) के पास एक 'शिकायत अधिकारी' (Grievance Officer) होता है। नियम के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद इन कंपनियों को 24 घंटों के भीतर ऐसी सामग्री को हटाना अनिवार्य है।

आईटी अधिनियम की महत्वपूर्ण धाराएं

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, शिकायत दर्ज करते समय आपको आईटी अधिनियम की निम्नलिखित धाराओं का उल्लेख करना चाहिए ताकि पुलिस कार्रवाई प्रभावी हो सके:

  • धारा 66E: गोपनीयता के उल्लंघन (Violation of Privacy) के लिए सजा।
  • धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित करने पर दंड।
  • धारा 67A: यौन रूप से स्पष्ट सामग्री (Sexually Explicit Content) प्रसारित करने पर कठोर सजा।
  • धारा 67B: बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री के प्रसार पर सख्त प्रावधान।

शिकायत कैसे करें?

पीड़ित व्यक्ति अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन के साइबर सेल में जा सकते हैं या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cybercrime Reporting Portal) के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यदि पीड़ित नाबालिग है, तो उसे तुरंत किसी भरोसेमंद वयस्क या शिक्षक की मदद लेनी चाहिए।