ड्रेडो के नए पिनाका Mk-3 रॉकेट ने ओडिशा के बालासोर रेंज पर 60 किमी दूर के लक्ष्य को केवल 37 सेकंड में ध्वस्त किया। यह हथियार कम लागत, उच्च गति और सटीकता के कारण भारत की रणनीतिक क्षमताओं में नया मोड़ लाता है।
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने ओडिशा के बालासोर टेस्ट रेंज पर पिनाका Mk-3 रॉकेट का सफल परीक्षण किया, जिसमें 60 किमी दूर के लक्ष्य को 37 सेकंड में मार गिराया गया। यह गति लगभग मैच 4.7 के बराबर है, जो हाइपरसोनिक सीमा (मैच 5) के बहुत करीब है, और इसे विश्व का सबसे तेज़ आर्टिलरी रॉकेट बना देता है।
पिनाका Mk-3 की तकनीकी विशिष्टताएँ
पिनाका Mk-3 ने 4.7 मैक की गति हासिल की, जबकि चीन के PHL‑16 (4.5 मैक), रूस के ग्रैड (3 मैक) और अमेरिकी HIMARS (2.7 मैक) से आगे है। इस गति के साथ, लक्ष्य का पता चलने से पहले ही रॉकेट अपना प्रभावी दायरा पार कर चुका होता है, जिससे विरोधी की रडार प्रतिक्रिया असफल रहती है।
मार्क‑3 का अर्थ और विकास यात्रा
‘Mark’ शब्द हथियार की पीढ़ी को दर्शाता है; पिनाका Mk‑3 तीसरी पीढ़ी का संस्करण है। 1980 के दशक में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट कई तकनीकी बाधाओं के कारण धीमा रहा, पर 1999 के बाद भारत‑पाकिस्तान के तनाव ने इसे तेज़ी से आगे बढ़ाया। अब यह रॉकेट 100‑120 किमी की अनुमानित दूरी को कवर कर सकता है, जिससे गहरी पैठ की रणनीति साकार होती है।
लागत‑प्रभावशीलता और रणनीतिक महत्व
प्रलय जैसी शॉर्ट‑रेंज मिसाइल की लागत लगभग 6‑7 करोड़ रुपये है, जबकि पिनाका Mk‑3 की कीमत मात्र 1.5 करोड़ रुपये है—अर्थात् लगभग पाँच गुना सस्ता। इस कीमत पर यह रॉकेट प्रलय के समान दूरी और सटीकता प्रदान करता है, जिससे भारत के रक्षा बजट में बड़ी बचत होती है और साथ ही तेज़, सटीक प्रतिक्रिया सुनिश्चित होती है।
भौगोलिक और सुरक्षा परिप्रेक्ष्य
भारत के दो मुख्य सुरक्षा चुनौतियों—चीन के एलएसी (लाइन्न ऑफ़ एक्टुअल कंट्रोल) पर स्थित रडार स्टेशन और पाकिस्तान के सीमा‑के‑निकट आतंकवादी ठिकाने—के सामने पिनाका Mk‑3 एक अनिवार्य हथियार बनता जा रहा है। लंबी दूरी और तेज़ गति के कारण यह रॉकेट इन महत्त्वपूर्ण लक्ष्यों को न्यूनतम चेतावनी के साथ नष्ट कर सकता है।